मन्ना डे के सदाबहार गीतों से गूंजा वानप्रस्थ

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13वीं पुण्यतिथि पर संगीतमय श्रद्धांजलि; डॉ. पुष्पा खरब को छठा पेटेंट मिलने पर दी बधाई

हिसार। वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन्स क्लब में महान पार्श्वगायक मन्ना डे की 13वीं पुण्यतिथि पर संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। सदस्यों ने उनके सदाबहार गीतों की प्रस्तुति देकर उनकी संगीत साधना को नमन किया। गीतों ने श्रोताओं को पुरानी यादों से जोड़ते हुए कभी भावुक किया तो कभी झूमने पर मजबूर कर दिया।

क्लब के महासचिव डॉ. जे. के. डांग ने सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि मन्ना डे ने शास्त्रीय संगीत की गंभीरता और सुगम संगीत की मधुरता का अनूठा संगम प्रस्तुत कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। ‘ऐ मेरे प्यारे वतन’, ‘लागा चुनरी में दाग’ और ‘पूछो ना कैसे मैंने रैन बिताई’ जैसे गीत उनकी विलक्षण प्रतिभा के प्रमाण हैं। उनकी आवाज और संगीत साधना सदैव याद की जाती रहेगी।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. पुष्पा खरब ने किया। उन्होंने मन्ना डे के जीवन और संगीत यात्रा से जुड़े रोचक प्रसंग साझा करते हुए उनकी गायन प्रतिभा तथा संगीत के प्रति समर्पण पर प्रकाश डाला।

प्राण की वेशभूषा में प्रस्तुति ने बटोरी तालियां

संगीतमय प्रस्तुतियों की शुरुआत डॉ. रमेश हुड्डा ने ‘नदिया चले, चले रे धारा’ से की। वीना अग्रवाल ने ‘ऐ मेरी जोहराजबीं’ प्रस्तुत कर समां बांधा। डॉ. आर. डी. शर्मा ने फिल्म ‘उपकार’ का गीत ‘कसमें वादे प्यार वफा सब’ सुनाया। अभिनेता प्राण की वेशभूषा में उनकी प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही और सभागार तालियों से गूंज उठा।

डॉ. पुष्पा खरब ने ‘लागा चुनरी में दाग’ की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। डॉ. एम. एस. मलिक ने ‘पल भर की पहचान आपसे’ सुनाया, जबकि आदेश मलिक ने ‘दर्शन दो घनश्याम नाथ’ से वातावरण को भक्तिमय बनाया। डॉ. कमलेश कुकड़ेजा ने ‘ऐ मेरे प्यारे वतन’ गाकर श्रोताओं को भावविभोर किया। अजीत सिंह ने ‘नथली से टूटा मोती रे’ प्रस्तुत कर कार्यक्रम में लोकधुन की मिठास घोली।

युगल गीतों और सामूहिक गायन ने बांधा समां

डॉ. सुनीता सुनेजा और योगेश सुनेजा ने ‘ये रात भीगी-भीगी’ की युगल प्रस्तुति दी। डॉ. एम. एस. राणा ने ‘जिंदगी कैसी है पहेली’ के माध्यम से जीवन के विविध रंगों को स्वर दिए। डॉ. कमल धवन और डॉ. एस. एस. धवन ने ‘न जाने कहां तुम थे, न जाने कहां हम थे’ सुनाया। योगेश सुनेजा ने ‘कौन आया मेरे मन के द्वारे’ की मधुर प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया।

डॉ. अजीत कुकड़ेजा और डॉ. कमलेश कुकड़ेजा ने ‘आजा सनम मधुर चांदनी में हम’ प्रस्तुत किया। डॉ. एस. एस. धवन ने ‘तू प्यार का सागर है’ से भक्ति और मानवता का संदेश दिया। सुरेंद्र भाटिया ने ‘तुझे सूरज कहूं या चंदा’ सुनाकर वात्सल्य का भाव जगाया। एकल प्रस्तुतियों के अंत में डॉ. आर. के. सैनी ने ‘पूछो ना कैसे मैंने रैन बिताई’ गाकर खूब सराहना बटोरी।

डॉ. पुष्पा खरब की उपलब्धि पर जताई खुशी

सदस्यों ने मन्ना डे के चुनिंदा गीतों की सामूहिक गीतमाला भी प्रस्तुत की। इसकी रूपरेखा डॉ. एस. एस. धवन ने तैयार की और निर्देशन का दायित्व अजीत सिंह ने निभाया।

क्लब के अध्यक्ष डॉ. एस. के. अग्रवाल ने सभी गायकों की सराहना की और आयोजन में योगदान देने वाले सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने मन्ना डे के जीवन से जुड़े रोचक प्रसंग भी सुनाए।

इस अवसर पर डॉ. जे. के. डांग ने बताया कि डॉ. पुष्पा खरब को उनका छठा पेटेंट प्राप्त हुआ है। सदस्यों ने तालियां बजाकर उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी। डॉ. पुष्पा खरब ने सभी के स्नेह और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया तथा अपनी खुशी साझा करने के लिए पार्टी का आयोजन किया।

कार्यक्रम का समापन मन्ना डे की संगीत विरासत को नमन करते हुए हुआ। सदस्यों ने कहा कि महान कलाकार अपनी कला और अमर स्वरों के माध्यम से सदैव लोगों के हृदय में जीवित रहते हैं।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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