केसरी क्लब के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भजन, कविता और हास्य की प्रस्तुतियां
सितंबर और अक्टूबर में जन्मे सदस्यों का सामूहिक जन्मदिन मनाया

गुरुग्राम। सेक्टर-4 स्थित कम्युनिटी सेंटर में वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की गुरुग्राम इकाई ने माह के चौथे शनिवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया। संस्था के प्रधान एवं फोरबा के चेयरमैन धर्मसागर की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में सदस्यों ने भजन, गीत, कविता, शायरी और हास्य प्रस्तुतियों से समां बांधा। मंच संचालक डी.एन. कवातरा ने गायत्री मंत्र के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की।
धर्मसागर ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए बताया कि संस्था के वार्षिकोत्सव की अधिकांश तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कुछ दिनों बाद अंतिम रिहर्सल होगी, जिसमें संस्था की पदाधिकारी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता पूनम भटनागर शामिल होकर प्रस्तुतियों को अंतिम रूप देंगी।
कविताओं में माँ की ममता और अपनों की परवाह
धर्मसागर ने ‘माँ धरती की चुनर धानी, माँ हो सुख की छैंया रे, कल्पतरु सी माँ रे भैया, पार लगावे नैया रे’ सुनाकर माँ की ममता को शब्द दिए। उन्होंने ‘मेरी खुशियाँ, मेरे सपने, मेरे बच्चे, मेरे अपने, यह करते-करते शाम हुई, अपनों की परवाह में देखो, उम्र तमाम हुई’ पंक्तियों के माध्यम से जीवन और पारिवारिक रिश्तों की भावनाएं व्यक्त कीं।
भजन गायक धर्मप्रकाश ने ‘चरणों से लगाए रखना, प्रभु प्रेम बनाए रखना’ और ब्रह्मप्रकाश ने ‘वो हटा रहे पर्दा चुपके-चुपके’ की प्रस्तुति दी। क्लब के ब्रांड एंबेसडर नंदकिशोर सरदाना ने ‘पैसा कोई खास सहारा तो नहीं, लेकिन पैसे के बिना गुजारा भी नहीं’ सुनाया। लगभग चार माह बाद अमेरिका से स्वदेश लौटे नंदकिशोर सरदाना और उनकी धर्मपत्नी पुष्पा सरदाना का सदस्यों ने स्वागत किया।
भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण
जगदीश अरोड़ा ने ‘रामजी करेंगे बेड़ा पार’, लाजपत चावला ने ‘तेरे आगे लाज मुझे आती नहीं, मांगने की आदत जाती नहीं’ और जगदीश गुलाटी ने ‘मैय्या कहती है आ मेरे लाल’ सुनाया। कैलाश चंद वर्मा और मिथलेश मलिक ने भी भजन प्रस्तुत किए। एल.डी. बवेजा ने ‘बड़े बड़ाई न करें, बड़े न बोलें बोल’ सुनाकर विनम्रता का संदेश दिया।
बवेजा ने धर्मसागर के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने नाम के अनुरूप समाज में परोपकार के कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में संस्था आगे बढ़ रही है और प्रत्येक सदस्य को मंच पर अपनी बात रखने का अवसर तथा सम्मान मिलता है।
शायरी और हास्य ने बिखेरी मुस्कान
मंच संचालक डी.एन. कवातरा ने ‘ख्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की, जो आप मुझे पहचानते हो, मेरे लिए तो बस इतना ही काफी है’ सहित विभिन्न शायरी प्रस्तुत कीं। उन्होंने हंसने-हंसाने और सभी को खुश रखने की भावना भी व्यक्त की।
मदनलाल डूडेजा ने यमराज और एक व्यक्ति की चतुराई पर आधारित हास्य प्रसंग सुनाकर सदस्यों को खूब हंसाया। प्रसंग में व्यक्ति यमराज की सूची में अपना नाम सबसे ऊपर से हटाकर नीचे लिख देता है, लेकिन उसके आतिथ्य से प्रसन्न यमराज सूची में नीचे से शुरुआत करने की घोषणा कर देते हैं। डूडेजा ने इस प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया कि ईश्वर की लीला के आगे मनुष्य की चतुराई नहीं चलती।
कार्यक्रम में सितंबर और अक्टूबर माह में जन्मे सदस्यों का सामूहिक जन्मदिन भी मनाया गया। इस अवसर पर शिकायत निवारण समिति के सदस्य रमेश वशिष्ठ सहित आर.सी. धवन, चेतनदास ग्रोवर, आर.के. सिंगला, एफ.सी. चुघ, दीपचंद सब्रवाल, महेश नागपाल, ओमप्रकाश भाटिया, हरीश सरदाना, रमेश चंद, मनमोहन, अंजला वधवा, इंद्रेश कौर शर्मा, मूर्ति देवी और जगवती देवी सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष सदस्य उपस्थित रहे।








