बाजरा खरीद और खाद की कमी पर सरकार को घेरा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

वेद प्रकाश विद्रोही ने एमएसपी पर खरीद नहीं होने का आरोप लगाया, अहीरवाल में पर्याप्त डीएपी उपलब्ध कराने की मांग

रेवाडी, 13 अक्टूबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेद प्रकाश विद्रोही ने अहीरवाल क्षेत्र में बाजरा खरीद व्यवस्था और डीएपी खाद की उपलब्धता को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र की विभिन्न मंडियों में किसानों का बाजरा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नहीं खरीदा जा रहा है। भावांतर योजना के तहत चल रही खरीद व्यवस्था में भी खामियों के कारण किसान परेशान हैं। वहीं, सरसों और गेहूं की बिजाई के लिए पर्याप्त डीएपी नहीं मिलने से उनकी चिंता बढ़ रही है।

विद्रोही ने कहा कि सरकार मीडिया में किसान हितैषी होने और हरियाणा में 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्थिति इन दावों से मेल नहीं खाती। उनके अनुसार, रबी फसलों की बिजाई के लिए खाद की कोई कमी नहीं होने के सरकारी दावों के बावजूद किसानों को जरूरत के मुताबिक डीएपी नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कथनी और करनी का अंतर किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है।

‘राव आया, भाव आया’ के नारे पर सवाल

विद्रोही ने दावा किया कि पूरे अहीरवाल क्षेत्र में बाजरे का एक दाना भी एमएसपी पर नहीं खरीदा जा रहा है और खरीद भावांतर योजना के तहत हो रही है। उन्होंने अहीरवाल से जुड़े एक मंत्री के समर्थकों द्वारा बाजरा खरीद को लेकर ‘राव आया, भाव आया’ का नारा दोहराने पर भी आपत्ति जताई।

उन्होंने सवाल किया कि जब किसानों को घोषित एमएसपी पर अपनी उपज बेचने की सुविधा ही नहीं मिल रही, तो उन्हें बेहतर भाव दिलाने का श्रेय किस आधार पर लिया जा रहा है। विद्रोही ने कहा कि किसानों की वास्तविक स्थिति की अनदेखी कर नेताओं का महिमामंडन करना उचित नहीं है। उन्होंने इस संदर्भ में दिवंगत राव बिरेंद्र सिंह की विरासत का उल्लेख करते हुए नारे के इस्तेमाल पर सवाल उठाया।

बिजाई के समय खाद के लिए परेशान किसान

डीएपी की उपलब्धता का मुद्दा उठाते हुए विद्रोही ने पूछा कि सरसों और गेहूं की बिजाई के लिए पर्याप्त खाद नहीं मिलेगी तो किसान समय पर बुआई कैसे करेंगे। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति किसानों को कालाबाजारी में महंगे दाम पर खाद खरीदने के लिए मजबूर कर सकती है।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि यह समस्या किसी एक मौसम तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, भाजपा शासन के पिछले 12 वर्षों में रबी और खरीफ की फसलों के दौरान किसान बार-बार डीएपी तथा बाद में यूरिया की कमी की शिकायत करते रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

उन्होंने अहीरवाल क्षेत्र के भाजपा सांसदों और विधायकों की भूमिका पर भी नाराजगी जताई। विद्रोही ने आरोप लगाया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी प्रयास करने के साथ उनकी आवाज उठाने में भी विफल रहे हैं। उन्होंने सरकार से बाजरा खरीद व्यवस्था की खामियां दूर करने, किसानों को घोषित एमएसपी का लाभ दिलाने और बिजाई के समय पर्याप्त डीएपी उपलब्ध कराने की मांग की।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

error: Content is protected !!