भूमि सत्यापन, एग्री स्टैक आईडी और ओटीपी की समस्याओं से किसान परेशान होने का आरोप
भावांतर योजना की बजाय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सीधी खरीद की मांग
रेवाडी, 3 अक्टूबर 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की बाजरा और धान खरीद संबंधी घोषणाओं के बावजूद किसानों को मंडियों में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक अक्टूबर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकारी खरीद की घोषणा तो की, लेकिन कहीं विभिन्न कारण बताकर किसानों की उपज नहीं खरीदी जा रही, तो कई मंडियों में खरीद शुरू तक नहीं हुई है।
विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल क्षेत्र बाजरा उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। इसके बावजूद सरकार ने अपने वादे के अनुसार एमएसपी पर बाजरे की सीधी सरकारी खरीद करने की बजाय भावांतर योजना का रास्ता अपनाकर किसानों के साथ छल किया है। उनके अनुसार, वर्ष 2026 के सीजन में बाजरे की खरीद 2,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने और 600 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर देने की घोषणा की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद के पहले ही दिन व्यवस्था की खामियां सामने आ गईं। मंडियों में एमएसपी पर बाजरा बेचने पहुंचे किसानों को विभिन्न कारण बताकर लौटा दिया गया। ऐसे में किसानों को मजबूरी में अपना बाजरा 2,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से व्यापारियों को बेचना पड़ा।
भूमि सत्यापन अधूरा, किसान काट रहे चक्कर
विद्रोही ने दावा किया कि रेवाड़ी सहित अहीरवाल क्षेत्र में अभी तक लगभग एक तिहाई जमीन का भूमि सत्यापन नहीं हुआ है। भूमि सत्यापन के अभाव में किसानों को भावांतर योजना का लाभ लेने में भी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एग्री स्टैक आईडी और ओटीपी से जुड़ी समस्याओं के कारण भी किसानों को मंडियों से अपनी उपज बेचे बिना वापस लौटना पड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया गया है कि किसान परेशान होकर भावांतर योजना के तहत भी बाजरा बेचने से पीछे हटें और औने-पौने दाम पर व्यापारियों को उपज देने के लिए मजबूर हो जाएं। किसानों की सुविधा के लिए बनाई जाने वाली व्यवस्था ही उनके सामने बाधा बन रही है।
घोषणा और व्यवहार में अंतर खत्म करे सरकार
विद्रोही ने सवाल उठाया कि जब सरकार एमएसपी पर खरीद का वादा करती है, तो किसानों के सामने ऐसी प्रक्रियागत अड़चनें क्यों खड़ी की जा रही हैं? उन्होंने कहा कि भूमि सत्यापन, एग्री स्टैक आईडी और ओटीपी संबंधी दिक्कतों का खामियाजा किसान क्यों भुगतें?
उन्होंने मांग की कि भाजपा सरकार खरीद प्रक्रिया की बाधाएं तत्काल दूर करे और भावांतर योजना की बजाय एमएसपी पर बाजरे की सीधी सरकारी खरीद सुनिश्चित करे। विद्रोही ने कहा कि सरकार अपनी कथनी और करनी में अंतर समाप्त करे, ताकि किसानों को उपज का उचित मूल्य मिले और उन्हें मंडियों से खाली हाथ न लौटना पड़े।









