सुरुचि परिवार ने 11 शिक्षकों को किया अलंकृत

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के. सी. वधवा की पुण्य स्मृति में आयोजित मुशायरे में शायरों और कवियों ने लूटी महफ़िल

‘रो-रोकर चिड़िया कहती है, क्यों बच्चों के पर आए’ ने श्रोताओं को किया भावुक

गुरुग्राम, 3 अक्टूबर। सुरुचि साहित्य कला परिवार के तत्वावधान में 2 अक्टूबर, 2026 को शिक्षा गौरव एवं शिक्षक गौरव सम्मान समारोह तथा वार्षिक मुशायरे का आयोजन किया गया। दोपहर साढ़े तीन बजे से आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 11 शिक्षकों को अलंकृत किया गया। के. सी. वधवा की पुण्य स्मृति को समर्पित मुशायरे में प्रख्यात शायर अज़्म शाकिरी, प्रसिद्ध हास्य कवि सरदार मंजीत सिंह और वरिष्ठ कवि नरेश नाज़ ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं की भरपूर सराहना बटोरी।

शिक्षा और संस्कार देने वालों का सम्मान

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में आयोजित शिक्षक गौरव समारोह के मुख्य अतिथि प्रदीप कौशिक रहे, जबकि अध्यक्षता प्राचार्या निर्मल यादव ने की। डॉ. अशोक दिवाकर और डॉ. धनीराम अग्रवाल भी मंच पर उपस्थित रहे। डॉ. अशोक दिवाकर ने अतिथियों का परिचय कराया। संगीतज्ञ अनिल संदूजा ने सुमधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अलका सिंह, अनु सहगल, प्रणीत सुशील, कुलवंत कौशिक और विकास यादव को शिक्षा गौरव सम्मान प्रदान किया गया। शिक्षक के रूप में अनुकरणीय योगदान के लिए डॉ. मनोज तिवारी, विनोद कुमार, दीपिका चावला, स्वर्णजीत कौर, मिथिलेश कुमार और बिमला अजमेरिया को शिक्षक गौरव सम्मान से अलंकृत किया गया।

इस अवसर पर डॉ. धनीराम अग्रवाल ने कहा कि इन शिक्षकों को सम्मानित कर सुरुचि परिवार स्वयं गौरव का अनुभव कर रहा है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए मदन साहनी ने कहा कि समाज में परिवर्तन लाने वाली दो प्रमुख शक्तियां अध्यापक और छात्र हैं। सत्र के अंत में अंजना अरोड़ा ने मधुर स्वर में गीत प्रस्तुत किया।

शायरी में संवेदना, हास्य में जीवन के रंग

दूसरे सत्र में आयोजित मुशायरे की अध्यक्षता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लायन संदीप कुमार ने की। समाजसेवी बोधराज सीकरी मुख्य अतिथि रहे तथा ओम स्वीट्स के चेयरमैन ओम प्रकाश कथूरिया का सान्निध्य प्राप्त हुआ।

वरिष्ठ कवि नरेश नाज़ ने देशभक्ति और शृंगार रस की कविताओं से महफ़िल का शानदार आगाज़ किया। सरदार मंजीत सिंह ने हास्य रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया, वहीं बेटी पर केंद्रित मार्मिक रचना सुनाकर भावुक भी किया। बिमलेन्दु सागर की रचना ‘उर्मिला का संताप’ को भी खूब सराहा गया।

अज़्म शाकिरी की ग़ज़लों पर सभागार बार-बार तालियों से गूंज उठा। ‘हवा उड़ा के ले गई’ और ‘झूठ बोलकर’ जैसी ग़ज़लों के शेरों पर उन्हें भरपूर दाद मिली। मानवीय संवेदनाओं को स्वर देते हुए उन्होंने पढ़ा—

“लाखों सदमे ढेरों ग़म, फिर भी नहीं हैं आंखें नम।
एक मुद्दत से रोए नहीं, क्या पत्थर के हो गए हम।”

जीवन और रिश्तों की कसक को बड़ी सादगी से व्यक्त करती उनकी इन पंक्तियों ने श्रोताओं को विशेष रूप से भावुक किया—

“हम जब अपने घर आए, आंख में आंसू भर आए।
रो-रोकर चिड़िया कहती है, क्यों बच्चों के पर आए।”

साहित्यप्रेमियों से भरा रहा सभागार

कार्यक्रम में तरुण वधवा, शरद गोयल, सतीश सिंगला, डी. वी. तनेजा, के. के. गांधी, प्रमोद सलूजा, अमिताभ गुप्ता, प्रमोद शर्मा, योगेश जोशी, कर्नल कुंवर प्रताप सिंह, गिरिराज ढींगरा और सुभाष सिंगला सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

श्रोताओं से खचाखच भरे सभागार में किशोर पाहुजा, शशांक शर्मा, हरीश कुमार, अर्जुन वशिष्ठ, रमा त्यागी, त्रिलोक कौशिक, दीपशिखा श्रीवास्तव, नीरज श्रीवास्तव, रवीन्द्र यादव, नरोत्तम शर्मा, सुरेन्द्र मनचंदा, मोहन कृष्ण भारद्वाज, दौलत राम कौशिक, मेघना शर्मा, मंजू भारती, संयम मराठा, आशा डाटा, नरेन्द्र यादव, डॉ. सुरेश वशिष्ठ, वीणा अग्रवाल, रेणु मिश्रा, राजपाल यादव, राम लाल ग्रोवर, विनय कुमार, अंजलि श्रीवास्तव, पिंकी गुप्ता और अनिल श्रीवास्तव सहित अनेक कवि, साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमियों ने काव्य प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

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Author: Bharat Sarathi

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