मजदूरों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के मुद्दों पर एकजुट संघर्ष का आह्वान; 26 अक्टूबर को गुरुग्राम से बड़ी संख्या में शामिल होने का प्रस्ताव पारित

गुरुग्राम, 2 अक्टूबर। धनवापुर स्थित आंबेडकर भवन में शुक्रवार को आयोजित विचार गोष्ठी एवं परिचर्चा में मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों, छात्र-युवाओं और महिलाओं की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। जागरूक नागरिक मंच, मजदूर-कर्मचारी एवं सामाजिक संगठनों के साझा मंच के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए जन-अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट संघर्ष का आह्वान किया। सभा में आगामी 26 अक्टूबर को रोहतक में होने वाली प्रदेश स्तरीय महापंचायत में गुरुग्राम से बड़ी संख्या में भागीदारी का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जागरूक नागरिक मंच के अध्यक्ष रामशकल बौद्ध ने की तथा मंच संचालन वजीर सिंह ने किया।
साझा संघर्ष से होगी अधिकारों की रक्षा

मुख्य वक्ता ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंह एडवोकेट ने मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों, छात्र-युवाओं और महिलाओं की समस्याओं को विस्तार से रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां जनहित के बजाय कॉरपोरेट जगत के मुनाफे को प्राथमिकता देकर बनाई जा रही हैं।
राजेंद्र सिंह ने कहा कि समाज के शोषित और पीड़ित तबकों की समस्याओं के समाधान तथा अधिकारों की बहाली के लिए साझा संघर्ष जरूरी है। जब तक सभी प्रभावित वर्ग एकजुट होकर आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक उनके अधिकारों की प्रभावी रक्षा संभव नहीं होगी।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठाए सवाल
ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गेनाइजेशन (एआईडीवाईओ) के प्रदेश संयोजक बलवान सिंह ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इसके जरिए देश के लगभग 13 करोड़ गरीब, मजदूर और वंचित नागरिकों के नाम मतदाता सूचियों से हटाने की साजिश है।
बलवान सिंह ने इसे मताधिकार और लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए व्यापक जन-एकजुटता आवश्यक है।
श्रम संहिताओं, ठेकेदारी और आउटसोर्सिंग का विरोध
एआईयूटीयूसी के जिला सचिव श्रवण कुमार ने चार श्रम संहिताओं, ठेकेदारी प्रथा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रम कानूनों में बदलाव के जरिए कामगारों की सुरक्षा कमजोर की जा रही है और रोजगार की अस्थिरता बढ़ रही है।
उन्होंने आशा, आंगनवाड़ी और मिड-डे मील कार्यकर्ताओं की समस्याएं उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण सेवाएं देने के बावजूद इन योजना कर्मियों को न्यूनतम वेतन और पक्के कर्मचारी के दर्जे से वंचित रखा गया है। उन्होंने इनके श्रम का उचित सम्मान और अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की।
बेरोजगारी, पेपर लीक और शिक्षा के व्यवसायीकरण पर चिंता
युवा संगठन एआईडीवाईओ की ओर से कमल कांत ने बेरोजगारी, पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि बढ़ती बेरोजगारी और बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
कमल कांत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए शिक्षा का व्यवसायीकरण और बाजारीकरण बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने युवाओं और छात्रों से अपने अधिकारों के लिए संगठित होने का आह्वान किया।
स्थानीय समस्याओं पर भी हुई चर्चा
सूरत नगर फेज-2 संघर्ष समिति की ओर से निरंजन लाल ने स्थानीय बुनियादी समस्याओं और नागरिक अधिकारों के हनन से जुड़े मुद्दे रखे। उन्होंने आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई।
सेवानिवृत्त एएसआई धर्म सिंह और मुकेश सिंगला ने भी गोष्ठी को संबोधित किया। दोनों वक्ताओं ने जनसमस्याओं को लेकर एकजुटता और साझा प्रयासों पर बल दिया।
26 अक्टूबर को रोहतक पहुंचने का आह्वान
अध्यक्षीय संबोधन में रामशकल बौद्ध ने सभी वक्ताओं और उपस्थित नागरिकों का धन्यवाद किया। सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि 26 अक्टूबर 2026 को प्रातः 11:30 बजे नांदल भवन, बोहर, रोहतक में आयोजित हरियाणा प्रदेश स्तरीय किसान-मजदूर-छात्र-युवा-महिला महापंचायत में गुरुग्राम से बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। उपस्थित लोगों ने महापंचायत को सफल बनाने का संकल्प लिया।
गोष्ठी में राम किशन, सरवन कुमार, पवन कुमार, बलवान सिंह, अत्तर सिंह, बदल सिंह बौद्ध, डी. डी. तोमर, धर्मवीर बाल सिंह, लाल सिंह, वजीर सिंह, मुकेश सिंगला, सेवानिवृत्त एएसआई धर्म सिंह, रामशकल बौद्ध, संतोष कुमार, रामबहादुर सिंह, मुन्ना पटेल, कमल कांत, महेश शर्मा, होमसिंह लाठर, हेमराज, निरंजन लाल, विनोद मीणा और ओ. पी. मीणा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, मजदूर एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।








