चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवालों का तथ्यात्मक जवाब दे चुनाव आयोग : कुमारी सैलजा

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राहुल गांधी द्वारा सामने रखे गए तथ्यों तथा दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों की स्वतंत्र जांच हो

उत्तराखंड में स्वतः जनरेट हुए फॉर्म -7 का आदेश, नियम और पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए

चंडीगढ़/नई दिल्ली 25 सितंबर। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, सीडब्ल्यूसी सदस्य एवं उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों और चुनावी सॉफ्टवेयर को लेकर जो गंभीर सवाल उठाए हैं, उन्हें राजनीतिक आरोप बताकर खारिज नहीं किया जा सकता। मीडिया रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कई अवसरों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की बात सामने आने से पूरा मामला और गंभीर हो गया है। चुनाव आयोग को इन आपत्तियों, उन पर लिए गए निर्णयों और सॉफ्टवेयर की भूमिका से संबंधित पूरा रिकॉर्ड देश के सामने रखना चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि उत्तराखंड में एसआईआर के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार 42,030 फॉर्म-7 आवेदन एईआरओ तथा 22,443 आवेदन ईआरओ के नाम से दाखिल दिखाए गए। फॉर्म-7 किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने की आपत्ति के लिए होता है, इसलिए यह स्वाभाविक सवाल है कि जिस ईआरओ को इन आपत्तियों पर निष्पक्ष निर्णय लेना है, उसी के नाम से हजारों आवेदन कैसे दर्ज हो गए। पंजाब में ई आरओ और एईआरओ के नाम से ऐसी आपत्तियों की संख्या केवल 215 बताई गई है, जबकि उत्तराखंड में यह आंकड़ा 64 हजार से अधिक होना असामान्य है और इसकी स्पष्ट व्याख्या जरूरी है।

सांसद ने कहा कि उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से अब लगभग 95 हजार फॉर्म-7 आवेदन सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्वतः जनरेट होने की बात स्वीकार की गई है। यदि किसी मतदाता को “लॉजिकल डिक्रिपेनसी के आधार पर अपात्र चिह्नित करते ही ईसीआईE-नेट स्वयं फॉर्म-7 तैयार कर देता है, तो चुनाव आयोग बताए कि यह व्यवस्था किस वैधानिक नियम, सक्षम अधिकारी के आदेश और निर्धारित प्रक्रिया के तहत लागू की गई। प्रत्येक स्वतः जनरेट फॉर्म-7 का डिजिटल लॉग, कारण, तारीख, अधिकृत अधिकारी और की गई सुनवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि राहुल गांधी हरियाणा और महाराष्ट्र की मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं, असामान्य तरीके से मतदाताओं के नाम जुड़ने-हटने तथा केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर के उपयोग का मुद्दा पहले भी प्रमाणों के साथ उठा चुके हैं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन किया है, लेकिन केवल खंडन से नागरिकों का विश्वास बहाल नहीं होगा। हरियाणा, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के संबंधित चुनावी डेटा, आवेदन प्रक्रिया, आईपी लॉग तथा मतदाता सूची में किए गए प्रत्येक बदलाव की स्वतंत्र तकनीकी और न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।

सांसद ने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण आवश्यक है, लेकिन किसी पात्र नागरिक का मताधिकार तकनीकी त्रुटि, अपारदर्शी सॉफ्टवेयर अथवा यांत्रिक प्रक्रिया के कारण नहीं छीना जा सकता। कांग्रेस की मांग है कि किसी भी नाम को पर्याप्त नोटिस, व्यक्तिगत सुनवाई और कारणयुक्त आदेश के बिना न हटाया जाए; सभी फॉर्म-7 का विधानसभा क्षेत्रवार विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव कराने के साथ-साथ देश के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना भी है।

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Author: Bharat Sarathi

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