सीएंडडी को लेकर एमसीजी ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

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निर्माण एवं विध्वंस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर, 200 वर्गमीटर या उससे अधिक के डिमोलिशन प्रोजेक्ट और 20,000 वर्गमीटर या उससे अधिक बिल्ट-अप एरिया वाले प्रोजेक्ट के लिए तय की गई स्पष्ट व्यवस्था

गुरुग्राम, 22 सितंबर। नगर निगम गुरुग्राम ने शहर में निर्माण एवं तोड़फोड़ वेस्ट (सीएंडडी वेस्ट) के बेहतर प्रबंधन और निर्धारित नियमों के प्रभावी अनुपालन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त प्रदीप दहिया द्वारा जारी आदेशों में निर्माण, विध्वंस, रिमॉडलिंग और रेनोवेशन से निकलने वाले सीएंडडी वेस्ट के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण एवं उपयोग को लेकर विभिन्न प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।

आदेश में पर्यावरण (निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट) प्रबंधन नियम, 2025, हरियाणा की सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी 2019 तथा सीएक्यूएम के दिशा-निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया गया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

200 वर्गमीटर या अधिक के डिमोलिशन प्रोजेक्ट के लिए अनिवार्य व्यवस्था

एमसीजी ने 200 वर्गमीटर या उससे अधिक प्लॉट एरिया वाले ऐसे प्रोजेक्ट, जिनमें निर्माण या पुनर्निर्माण से पहले विध्वंस किया जाना है, उनके लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की है। ऐसे प्रत्येक आवेदक को बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के लिए आवेदन करते समय प्रस्तावित डिमोलिशन से उत्पन्न होने वाले सीएंडडी वेस्ट की अनुमानित मात्रा की घोषणा करनी होगी। निर्माण या पुनर्निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित डिमोलिशन वेस्ट को एमसीजी की अधिकृत प्रोसेसिंग फैसिलिटी या निर्धारित कलेक्शन प्वाइंट पर जमा करना होगा तथा इसकी रसीद प्राप्त करनी होगी। आदेश के अनुसार, संबंधित प्रमाण के सत्यापन के बाद ही ऑक्यूपेंसी व कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।

20,000 वर्गमीटर या अधिक बिल्ट-अप एरिया वाले प्रोजेक्ट के लिए विशेष प्रावधान

20,000 वर्गमीटर या उससे अधिक बिल्ट-अप एरिया वाले प्रोजेक्ट के लिए आवेदक/निर्माता को इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लान तैयार कर एमसीजी पोर्टल के माध्यम से स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करना होगा। ऐसे प्रोजेक्ट से उत्पन्न सीएंडडी वेस्ट को संबंधित प्रोड्यूसर द्वारा एमसीजी की रीसाइक्लिंग फैसिलिटी में स्वयं के वाहनों के माध्यम से जमा कराया जाना होगा। इसके लिए सीएंडडी वेस्ट का डिपॉजिट एमसीजी सीएंडडी पोर्टल के माध्यम से रूट किया जाएगा।

रीसाइकल्ड सीएंडडी सामग्री का निर्माण कार्यों में उपयोग

आदेश में प्रोसेस किए गए सीएंडडी से तैयार सामग्री के उपयोग पर भी जोर दिया गया है। संबंधित प्रोजेक्ट में निर्माण सामग्री की न्यूनतम निर्धारित मात्रा के अनुसार रीसाइकल्ड एग्रीगेट, मैन्युफैक्चर्ड सैंड तथा अन्य रीसाइकल्ड उत्पादों का उपयोग किया जाएगा। भवन निर्माण के लिए निर्धारित न्यूनतम प्रतिशत के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में 5 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2027-28 में 10 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2028-29 में 15 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2029-30 में 20 प्रतिशत तथा वित्त वर्ष 2030-31 से आगे 25 प्रतिशत उपयोग शामिल है।सड़क निर्माण से जुड़े प्रोजेक्टों के लिए 2026-27 एवं 2027-28 में 5 प्रतिशत, 2028-29 एवं 2029-30 में 10 प्रतिशत तथा 2030-31 से आगे 15 प्रतिशत का प्रावधान किया गया है।

एमसीजी क्षेत्र के सभी विभागों के सरकारी प्रोजेक्ट भी दायरे में

आदेश में एमसीजी क्षेत्र में कार्य करने वाले सभी सरकारी विभागों के लिए भी सीएंडडी वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। सरकारी प्रोजेक्टों से उत्पन्न सीएंडडी वेस्ट को एमसीजी द्वारा स्थापित प्रोसेसिंग फैसिलिटी या मोबाइल प्लांट के माध्यम से इन-सिटू रीसाइक्लिंग की व्यवस्था के अनुसार निस्तारित करना होगा। इसके अलावा, टेंडर दस्तावेजों में परियोजना से उत्पन्न होने वाले अनुमानित सीएंडडी वेस्ट की मात्रा का उल्लेख करना और सुरक्षित निस्तारण का प्रमाण लेना अनिवार्य किया गया है।

सड़क, सीवर और पानी के कार्यों में कचरा हटाने की समय-सीमा

निर्माण एवं मरम्मत कार्यों के दौरान निकलने वाले सीएंडडी वेस्ट को लेकर भी समय-सीमा निर्धारित की गई है। आरओडब्ल्यू रिपेयर या रेस्टोरेशन कार्य पूरा होने के 48 घंटे के भीतर, सड़क मरम्मत, रिसर्फेसिंग एवं रोड रेस्टोरेशन में अधिकतम 72 घंटे के भीतर सीवर लाइन कार्य पूरा होने के 72 घंटे के भीतर अतिरिक्त खुदाई सामग्री एवं सीएंडडी वेस्ट हटाना होगा। इसी प्रकार जलापूर्ति लाइन का कार्य पूरा होने के 72 घंटे के भीतर अतिरिक्त सामग्री एवं सीएंडडी वेस्ट हटाना, निर्माण, रेनोवेशन, रिकंस्ट्रक्शन एवं डिमोलिशन कार्यों से निकलने वाले सीएंडडी वेस्ट को निर्धारित क्षेत्र में संग्रहित करना होगा। सार्वजनिक स्थान पर जमा कचरे को 24 घंटे के भीतर हटाने का प्रावधान भी आदेश में दिया गया है।

एमसीजी में बनेगा सीएंडडी मॉनिटरिंग सेल

सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट की निगरानी के लिए एमसीजी में सीएंडडी मॉनिटरिंग सेल गठित करने का प्रावधान किया गया है। इसमें सीएंडडी के प्रभारी अतिरिक्त आयुक्त को सेल का प्रमुख बनाया जाएगा, जबकि एक जूनियर इंजीनियर और दो ऑपरेटर्स इसके संचालन में शामिल होंगे। यह सेल एमसीजी के सीएंडडी मॉनिटरिंग और पोर्टल के माध्यम से ठेकेदारों एवं सरकारी विभागों द्वारा नियमों के अनुपालन की लगातार निगरानी करेगा तथा उल्लंघन के मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

पोर्टल के माध्यम से होगी निगरानी

आदेश में सभी सरकारी विभागों को एमसीजी सीएंडडी वेस्ट पोर्टल mcg-sms.auster.biz/cd-waste पर पंजीकरण कराने तथा प्रोजेक्ट ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएंडडी वेस्ट का डिपॉजिट और रीसाइकल्ड सामग्री की खरीद से संबंधित प्रक्रिया पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाएगी।

उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

एमसीजी ने निर्देशों का पालन नहीं करने को गंभीरता से लेने की बात कही है। उल्लंघन के मामलों में संबंधित प्रावधानों के तहत पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। गंभीर उल्लंघनों के मामलों में सीएक्यूएम एक्ट 2021 की धारा 14 के तहत कार्रवाई की संभावना भी आदेश में दर्ज है।

रीसाइकल्ड उत्पादों को बढ़ावा

आदेश में आवेदकों एवं संपत्ति मालिकों को पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध रिसाइकिल्ड प्रोडक्ट मार्केटप्लेस से रीसाइकल्ड सीएंडडी उत्पादों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इनमें गैर-संरचनात्मक कार्यों के लिए कर्ब स्टोन, बोलार्ड, फुटपाथ टाइल्स, पार्क बेंच, प्लांटर, ड्रेन कवर और ट्री गार्ड जैसे उत्पाद शामिल हैं।

निर्माण गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी पर जोर

एमसीजी द्वारा जारी इन दिशा-निर्देशों में निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से निकलने वाले कचरे को अनधिकृत स्थानों पर डंप करने के बजाय अधिकृत प्रोसेसिंग एवं रीसाइक्लिंग व्यवस्था से जोड़ने, रीसाइकल्ड सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देने और डिजिटल पोर्टल के माध्यम से निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया गया है। आदेश का उद्देश्य गुरुग्राम में सीएंडडी वेस्ट के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित, निगरानी योग्य और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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