एससी-एसटी की तरह ओबीसी की पहचान दर्ज करने की व्यवस्था की मांग
कहा—जातिगत गणना ऐसी हो जिससे सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आए
रेवाड़ी, 22 सितम्बर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जनगणना-2027 में होने वाली जातिगत गणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की पहचान दर्ज करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि देश की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का वास्तविक आकलन तभी संभव होगा, जब जातिगत आंकड़े स्पष्ट और वैज्ञानिक तरीके से एकत्र किए जाएं।
विद्रोही ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना के लिए जिस तरह स्पष्ट पहचान और अधिसूचित सूचियों के आधार पर व्यवस्था रही है, उसी प्रकार ओबीसी की विभिन्न जातियों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष और ओबीसी वर्ग की लगातार मांग के बाद केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के साथ जातिगत गणना कराने का निर्णय तो लिया है, लेकिन इसकी प्रक्रिया को लेकर अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ओबीसी की पहचान और उसकी अधिसूचित जातियों के नाम दर्ज करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं होगी तो ओबीसी आबादी की वास्तविक संख्या तथा उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विश्वसनीय आकलन कैसे हो पाएगा।
विद्रोही ने मांग की कि जातिगत गणना की अंतिम प्रश्नावली तैयार करते समय ओबीसी समाज की इस चिंता को दूर किया जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें उत्तरदाता की जाति के साथ यह भी स्पष्ट रूप से दर्ज हो सके कि वह ओबीसी वर्ग से संबंधित है या नहीं।
उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना केवल संख्या गिनने की कवायद नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से विभिन्न सामाजिक वर्गों की शिक्षा, आर्थिक स्थिति और अन्य सामाजिक संकेतकों की वास्तविक तस्वीर सामने आनी चाहिए। ऐसे आंकड़े भविष्य में कल्याणकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण का आधार बन सकते हैं।
विद्रोही ने केंद्र सरकार से जाति गणना के नियम और प्रश्नावली पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि ओबीसी की पहचान को लेकर किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने सवाल किया कि जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की पहचान दर्ज करने की स्पष्ट व्यवस्था रही है तो ओबीसी के लिए भी ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने में क्या आपत्ति है? सरकार को इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और ऐसी जातिगत गणना सुनिश्चित करनी चाहिए जिससे ओबीसी सहित सभी सामाजिक वर्गों की वास्तविक स्थिति विश्वसनीय रूप से सामने आ सके।









