कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का आरोप—कागजों में कार्यालय, जमीन पर कहीं ताले तो कहीं चल रहा डांस स्टूडियो
चंडीगढ़, 10 सितम्बर। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने प्रदेश में पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित संदिग्ध चंदे के मामले की समयबद्ध एसआईटी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये का चंदा घोषित करने वाले कई संगठनों का धरातल पर कोई प्रभावी राजनीतिक अस्तित्व दिखाई नहीं देता।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करती है, लेकिन उसके शासन में ऐसे राजनीतिक संगठन करोड़ों रुपये का चंदा घोषित कर रहे हैं, जिनके वास्तविक कार्यालय और गतिविधियां सवालों के घेरे में हैं। कई जगह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पतों पर या तो ताले लटके मिले अथवा राजनीतिक कार्यालय के स्थान पर दूसरी गतिविधियां संचालित होती पाई गईं।
ईडी-सीबीआई की सक्रियता यहां क्यों नहीं?
उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्षी नेताओं के विरुद्ध छोटी-छोटी बातों पर ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल करने वाली भाजपा सरकार संदिग्ध राजनीतिक चंदे के मामलों पर चुप क्यों है?
उन्होंने कहा, “यह पैसा कहां से आया, किसके संरक्षण में आया और आखिर किसकी जेब में गया—इन सवालों का जवाब जनता को मिलना चाहिए।”
दर्ज पते पर मिला नृत्य स्टूडियो
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि हरियाणा से जुड़े एक राजनीतिक संगठन द्वारा करोड़ों रुपये का चंदा घोषित किए जाने के मामले में गंभीर तथ्य सामने आए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में दिल्ली में दर्ज उसके कार्यालय के पते की जमीनी पड़ताल करने पर वहां राजनीतिक कार्यालय के बजाय नृत्य स्टूडियो संचालित होता मिला।
उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल का कार्यालय ही संबंधित पते पर मौजूद नहीं है तो उसके नाम पर लिए गए करोड़ों रुपये के चंदे और वित्तीय लेन-देन की वास्तविकता की जांच आवश्यक है। सरकारी एजेंसियों को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कार्यालयों का भौतिक सत्यापन कराया जाए
राव नरेंद्र सिंह ने मांग की कि सरकार लीपापोती करने के बजाय तत्काल एसआईटी गठित करे। जांच के दायरे में सभी संदिग्ध पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के कार्यालयों का भौतिक सत्यापन, पंजीकरण दस्तावेज, राजनीतिक गतिविधियां और चंदे के स्रोत शामिल किए जाएं।
उन्होंने कहा कि संबंधित दलों के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन का विस्तृत ऑडिट कर यह पता लगाया जाए कि धन किन व्यक्तियों एवं संस्थाओं से प्राप्त हुआ और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यह मामला किसी एक संगठन तक सीमित न होकर आरयूपीपी की आड़ में कथित रूप से चल रहे संगठित वित्तीय फर्जीवाड़े की ओर संकेत करता है। जांच में अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता से खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। भाजपा सरकार को जवाब देना होगा कि करोड़ों रुपये के संदिग्ध चंदे की निगरानी कौन कर रहा था और अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?”








