आजादी के आंदोलन में आरएसएस से जुड़े लोगों के योगदान का प्रमाण सार्वजनिक करने की चुनौती
रेवाड़ी, 10 सितम्बर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि वह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत से लड़ते हुए वंदे मातरम् गाने और कुर्बानी देने वाले आरएसएस से जुड़े किसी एक व्यक्ति का नाम तथा प्रमाण सार्वजनिक करे।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सहित विभिन्न विचारधाराओं के स्वतंत्रता सेनानी वंदे मातरम् का उद्घोष करते हुए जेल गए और अनेक यातनाएं सहीं, लेकिन आरएसएस से जुड़े लोगों की भूमिका इस संघर्ष में दिखाई नहीं देती। उन्होंने सवाल किया कि स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय योगदान नहीं देने वाले संगठन आज वंदे मातरम् के नाम पर दूसरों को राष्ट्रभक्ति का प्रमाणपत्र कैसे दे सकते हैं?
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान केवल भाषणों और नारों से नहीं, बल्कि देश की एकता, स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति आचरण से सिद्ध होता है। भाजपा को वंदे मातरम् पर लंबे-चौड़े दावे करने के बजाय स्वतंत्रता आंदोलन में अपने वैचारिक पूर्वजों की भूमिका से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य जनता के सामने रखने चाहिए।
युवा इतिहास पढ़ें, तथ्यों से बनाएं राय
विद्रोही ने देश की युवा पीढ़ी, विशेषकर जेन-जी से स्वतंत्रता आंदोलन का प्रामाणिक इतिहास पढ़ने और विभिन्न संगठनों की भूमिका को तथ्यों के आधार पर समझने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को भावनात्मक नारों, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक प्रचार से प्रभावित होने के बजाय इतिहास तथा संविधान की कसौटी पर अपनी राय बनानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राष्ट्रवाद और वंदे मातरम् जैसे भावनात्मक विषयों का राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस्तेमाल कर रही है। देश के नागरिकों को नफरत और विभाजन की राजनीति से सतर्क रहते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, बलिदान और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को मजबूत करना चाहिए।








