सफाई कर्मियों से अपील – ‘सत्ता में बैठे नेताओं के घरों के बाहर फेंको कूड़ा, उसके बाद हमारे घर आना’
फरीदाबाद: एनआईटी 86 फरीदाबाद से पूर्व विधायक नीरज शर्मा आज नगर निगम फरीदाबाद के मुख्य द्वार पर अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों के समर्थन में पहुंचे। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के बीच बैठकर नीरज शर्मा ने उनकी मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों पर जमकर निशाना साधा।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने कहा कि सफाई कर्मचारी इस शहर की रीढ़ हैं, जो दिन-रात मेहनत करके शहर को स्वच्छ और बीमारियों से मुक्त रखते हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि मौजूदा सरकार इनके हक और अधिकारों पर डाका डालने का काम कर रही है।
“अगर आज कांग्रेस सरकार होती, तो आपको सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती”
पूर्व विधायक ने कांग्रेस शासनकाल की याद दिलाते हुए कहा, “जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब स्व. पंडित शिव चरण लाल शर्मा जी (पूर्व मंत्री, हरियाणा सरकार) ने अपने हाथों से 1800 सफाई कर्मचारियों को पक्का होने का (परमानेंट) नियुक्ति पत्र सौंपा था। अगर आज भी प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होती, तो हमारे सफाई कर्मचारी भाइयों-बहनों को अपनी जायज मांगों के लिए यूं चिलचिलाती धूप और सड़कों पर आंदोलन न करना पड़ता।”
2014 की पॉलिसी वैध, फिर कर्मचारियों को पक्का करने में क्या ऐतराज?
नीरज शर्मा ने 2014 की कर्मचारी नीति का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान बनाई गई 2014 की ‘3 साल सेवा पॉलिसी’ के तहत सफाई कर्मचारियों को पक्का करने में कोई कानूनी या प्रशासनिक बाधा नहीं है। इस पॉलिसी को माननीय उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) और सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) भी वैध और सही ठहरा चुके हैं। जब देश की सर्वोच्च अदालत ने इस नीति पर मुहर लगा दी है, तो फिर इस सरकार को कर्मचारियों को पक्का करने में आखिर क्या ऐतराज है? भाजपा सरकार नियत की खोट के कारण कर्मचारियों का हक मार रही है।
सफाई कर्मियों को दिया सुझाव: पहले सत्ताधारियों के द्वार, फिर विपक्ष के पास
प्रदर्शन में एकजुटता दिखाते हुए पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने सफाई कर्मचारियों के समक्ष एक सुझाव रखा। उन्होंने कहा, मैं सफाई कर्मचारी भाइयों से कहना चाहता हूँ कि वे अपने विरोध और प्रदर्शन का तरीका बदलें। सबसे पहले सत्ता में बैठे नेताओं के बंगलों व घरों के बाहर ले जाकर कूड़ा फेंकें, ताकि उन्हें आपकी मेहनत और आपकी अनुपस्थिति का अहसास हो। सत्ता में बैठे लोगों को जगाने के बाद यदि जरूरत पड़े तो हमारे (विपक्ष के) घरों के बाहर कूड़ा फेंकें। हम आपके इस कदम का भी स्वागत करेंगे क्योंकि हम आपके संघर्ष को समझते हैं।









