ईडी की कार्रवाई ने पेशेवर जवाबदेही और डिजिटल वित्तीय निगरानी की कमजोरियों पर खड़े किए गंभीर सवाल
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया (महाराष्ट्र) – प्रवर्तन निदेशालय की 2 सितंबर की बहु-राज्यीय कार्रवाइयों ने सफेदपोश आर्थिक अपराध के बदलते स्वरूप को सामने रखा है। साइप्रस आधारित ऑनलाइन सट्टेबाजी मंच परिमैच से जुड़े कथित धनशोधन नेटवर्क और एनएचएआई के टोल प्लाजा में कथित वित्तीय हेराफेरी की जांच बताती है कि अपराधी अब केवल नकदी या फर्जी बैंक खातों पर निर्भर नहीं हैं। भुगतान प्रणालियां, मुखौटा कंपनियां, अनधिकृत सॉफ्टवेयर और सीमा-पार लेन-देन उनके नए औजार बनते जा रहे हैं।
परिमैच प्रकरण की जांच में भुगतान सेवा प्रदाताओं के साथ कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सचिव, वकील और अन्य वित्तीय पेशेवर भी जांच के दायरे में आए हैं। आरोप है कि मुखौटा कंपनियों और जटिल लेन-देन के माध्यम से अवैध धन को वैध दिखाने अथवा विदेश भेजने में सहायता की गई। हालांकि जांच के दायरे में आना अपराध सिद्ध होना नहीं है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया से ही निकलेगा। इसलिए कुछ व्यक्तियों पर लगे आरोपों के आधार पर पूरे पेशेवर समुदाय को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं होगा।
दूसरी ओर, टोल प्लाजा से जुड़े मामले में कथित अनधिकृत सॉफ्टवेयर के माध्यम से वैध जैसी रसीदें बनाकर संग्रहित राशि को आधिकारिक लेखा प्रणाली से बाहर रखने की आशंका जताई गई है। यदि ये आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह केवल राजस्व चोरी नहीं, बल्कि डिजिटल शासन और सार्वजनिक विश्वास पर गंभीर प्रहार होगा।
इन कार्रवाइयों का बड़ा संदेश यह है कि वित्तीय व्यवस्था के विशेषज्ञ उसके संरक्षक भी हैं और उनकी जवाबदेही भी सबसे अधिक है। बैंकों, भुगतान कंपनियों, लेखा पेशेवरों, तकनीकी मंचों और नियामक संस्थाओं के बीच वास्तविक समय में सूचना साझा करने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी। वास्तविक लाभार्थी की पहचान, संदिग्ध लेन-देन की निगरानी और नियमित डिजिटल लेखा-परीक्षण अब विकल्प नहीं, आवश्यकता हैं।
डिजिटल भारत की सफलता केवल तेज भुगतान और तकनीकी विस्तार से नहीं मापी जा सकती। उसकी असली कसौटी यह होगी कि सार्वजनिक धन कितना सुरक्षित है और काले धन को व्यवस्था में प्रवेश दिलाने वाले ‘द्वारपालों’ पर कानून कितनी निष्पक्षता तथा कठोरता से कार्रवाई करता है।
-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र








