आरक्षण नीति की व्यापक समीक्षा कर वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाए सरकार
उच्च शिक्षण संस्थानों में निष्पक्ष और पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने की मांग
नई दिल्ली/गुरुग्राम। विश्व ब्राह्मण फेडरेशन के चेयरमैन शशिकांत शर्मा ने देश की आरक्षण व्यवस्था पर व्यापक और निष्पक्ष पुनर्विचार की आवश्यकता जताई है। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक एवं आर्थिक परिदृश्य में आरक्षण का प्रमुख आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति और वास्तविक सामाजिक आवश्यकता को बनाया जाना चाहिए।
शशिकांत शर्मा ने कहा कि देश में आरक्षण व्यवस्था सामाजिक न्याय के उद्देश्य से लागू की गई थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसकी समीक्षा आवश्यक है। किसी गरीब, वंचित और प्रतिभाशाली व्यक्ति को केवल उसकी जातिगत पहचान के कारण अवसरों से वंचित नहीं होना चाहिए। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें प्रत्येक जाति और वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को समान अवसर तथा आवश्यक संरक्षण मिल सके।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के परिवारों की समस्याओं को भी गंभीरता से समझने की जरूरत है। आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी कुछ सीमित परिवारों तक सिमटकर नहीं रहना चाहिए।
शर्मा ने कहा कि विश्व ब्राह्मण फेडरेशन सामाजिक न्याय और समान अवसर का समर्थक है, लेकिन सामाजिक न्याय के नाम पर किसी अन्य वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और सभी वर्गों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर आरक्षण नीति की समीक्षा करने की मांग की।
यूजीसी के नए प्रावधानों पर जताई चिंता
शशिकांत शर्मा ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए समता संबंधी प्रावधानों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकना और प्रत्येक विद्यार्थी को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए बनाए गए नियम स्पष्ट, संतुलित और दुरुपयोग की आशंका से मुक्त होने चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार और यूजीसी से इन प्रावधानों की व्यापक समीक्षा करने तथा विद्यार्थियों के बीच अनावश्यक भय, विभाजन अथवा भेदभाव की आशंका पैदा करने वाले प्रावधानों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि इनके स्थान पर सभी विद्यार्थियों के लिए समान अधिकार, समान सम्मान, पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
शर्मा ने कहा, “भारत को जाति के आधार पर बांटने के बजाय आर्थिक कमजोरी और वास्तविक आवश्यकता के आधार पर अवसर देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। सामाजिक समरसता और समान अवसर ही मजबूत एवं विकसित भारत की आधारशिला हैं।”









