रक्षाबंधन का पर्व हमारी संस्कृति और विरासत की प्राचीनता का प्रतीक है : डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र

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रक्षाबंधन के महान पर्व पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने बरगद, पीपल और नीम की त्रिवेणी पर रक्षा सूत्र बांध कर पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लिया।

रक्षाबंधन के पर्व पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा पर्व संवाद कार्यक्रम संपन्न।

रक्षाबंधन केवल भाई बहन के प्रेम का ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, एकता और सुरक्षा की भावना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है।

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 28 अगस्त : रक्षा सूत्र केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा का वचन नहीं है, बल्कि यह समाज के हर व्यक्ति के प्रति अपनत्व, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को जागृत करता है। यह पर्व हमें सर्वशक्तिमान ईश्वर के साथ जुड़कर सदाचारी और शांत जीवन जीने की प्रेरणा देता है। यह पर्व हमारी संस्कृति और विरासत की प्राचीनता का प्रतीक है। रक्षाबंधन के पर्व पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित पर्व संवाद कार्यक्रम में यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतमाता एवं योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के चित्र के समक्ष वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ। रक्षाबंधन के इस महान पर्व पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने बरगद, पीपल और नीम की त्रिवेणी पर रक्षा सूत्र बांध कर पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लिया। पर्व संवाद की अतिविशिष्ट अतिथि समाजसेविका श्रीमती मंजिका ने बहुत ही आध्यात्मिक वातावरण में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों को रक्षा सूत्र बांधकर उनके मंगलमय भविष्य की कामना की।

पर्व संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा रक्षा बंधन का मूल भाव पारिवारिक संबंधों की रक्षा और उन्हें मजबूत बनाने पर केंद्रित है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जिस प्रकार हम अपनों की रक्षा का वचन देते हैं, उसी प्रकार जीवनदायिनी प्रकृति और पेड़ों की रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है। रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का भी एक अनूठा संदेश देता है। रक्षाबंधन की जड़ें हमारी संस्कृति से बहुत ही गहराई के साथ जुड़ी हुई हैं।

डॉ.श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा यह पर्व समाज में कर्तव्य बोध, जिम्मेदारी और एक-दूसरे के सुख-दुख में ढाल बनकर खड़े रहने की प्रेरणा देता है और जाति, धर्म और वर्ग की सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को आपस में जोड़ता है। राखी का धागा केवल सगे संबंधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मित्रों, पड़ोसियों और समाज के अन्य सदस्यों के बीच भी आत्मीयता बढ़ाता है। रक्षाबंधन केवल भाई बहन के प्रेम का ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, एकता और सुरक्षा की भावना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। कार्यक्रम में समाजसेवी नरेंद्र मालिक अतिविशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। उन्होंने कहा मातृभूमि सेवा मिशन वास्तविक रूप से रक्षाबंधन के संदेश को आत्मसात कर अपने सामाजिक दायित्व का निर्वाह कर रहा है। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के सभी बच्चों को अति विशिष्ट अतिथि समाजसेविका मंजिका द्वारा स्कूल बैग उपहार स्वरूप भेंट किए गए। कार्यक्रम में आश्रम के सदस्य, विद्यार्थी, कार्यकर्ता एवं अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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