दल-बदल कर भाजपा में गए नेताओं की कांग्रेस पर टिप्पणियां राजनीतिक अवसरवाद का उदाहरण : वेदप्रकाश विद्रोही

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ग्रामीण भारत के अध्यक्ष ने कहा, दल-बदल की राजनीति से जनता के मन में नेताओं और राजनीति के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है।

वेदप्रकाश विद्रोही

रेवाडी, 17 जुलाई 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि हरियाणा की राजनीति में दल-बदल कर विभिन्न दलों में जाने वाले नेताओं का आचरण आम जनता के बीच राजनीति की साख को कमजोर कर रहा है। उन्होंने कहा कि जो नेता पहले कांग्रेस में रहकर सत्ता का लाभ उठाते थे, वही आज भाजपा में शामिल होकर कांग्रेस और उसके नेतृत्व की आलोचना कर रहे हैं।

विद्रोही ने कहा कि इस प्रकार की राजनीतिक अवसरवादिता और दल-बदल की प्रवृत्ति के कारण आमजन के मन में राजनीति और राजनेताओं के प्रति नकारात्मक भावना उत्पन्न हो रही है। उनका आरोप था कि जनसेवा के बजाय निजी हितों और राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देने वाली राजनीति ने सार्वजनिक जीवन की नैतिकता को प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं के कारण ईमानदारी और जनसेवा की भावना से राजनीति करने वाले अन्य जनप्रतिनिधियों की छवि भी प्रभावित होती है। उनके अनुसार, इससे लोगों का लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक नेतृत्व पर विश्वास कम होता है।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा कांग्रेस से आए नेताओं को कांग्रेस और उसके नेतृत्व की आलोचना के लिए आगे किया जाता है। उनका कहना था कि इससे एक ओर कांग्रेस को राजनीतिक रूप से घेरने का प्रयास होता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे नेताओं की राजनीतिक निर्भरता भी बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने पहले कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार के नेतृत्व की प्रशंसा की, वही आज भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी आलोचना कर रहे हैं। विद्रोही ने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन की स्थिति में ऐसे नेता भविष्य में फिर से अपना राजनीतिक रुख बदल सकते हैं।

ग्रामीण भारत के अध्यक्ष ने कहा कि दल-बदल की यह राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों और वैचारिक प्रतिबद्धता के लिए चुनौती है तथा राजनीतिक दलों को इस प्रवृत्ति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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