महिला संगठनों ने जनगणना और परिसीमन की शर्त हटाकर संसद के आगामी सत्र में महिला आरक्षण लागू करने की उठाई मांग, विपक्ष से संयुक्त अभियान चलाने की अपील।
गुरुग्राम। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, गुरुग्राम ने महिला आरक्षण अधिनियम-2023 को जनगणना और परिसीमन की शर्तों से अलग कर तत्काल लागू करने की मांग उठाई है। इस संबंध में शुक्रवार को समिति के प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष पंकज डावर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति की राज्य महासचिव उषा सरोहा, जिला प्रधान रामवती, कोषाध्यक्ष गिरजा कुमारी, जिला सचिव भारती देवी सहित अनेक महिला कार्यकर्ता मौजूद रहीं। ज्ञापन में कहा गया कि संसद द्वारा महिला आरक्षण कानून पारित हुए लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया है। इसके पीछे कानून को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़े जाने को मुख्य कारण बताया गया है।
समिति ने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे को किसी अन्य प्रशासनिक या राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़ना उचित नहीं है। इससे महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी हो रही है।
ज्ञापन में अप्रैल 2026 में प्रस्तुत 131वें संविधान संशोधन विधेयक का भी उल्लेख किया गया, जिसके माध्यम से महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को नई शर्तों से जोड़ने तथा सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे प्रस्ताव लाए गए थे। समिति ने दावा किया कि विपक्षी दलों के विरोध के चलते यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। साथ ही आशंका जताई गई कि आगामी संसद सत्र में केंद्र सरकार इसी प्रकार का नया विधेयक ला सकती है।
महिला समिति ने अपने ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें महिला आरक्षण अधिनियम-2023 को जनगणना एवं परिसीमन की शर्तों से मुक्त करने, संसद और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण को तत्काल लागू करने, महिला आरक्षण को किसी अन्य राजनीतिक या विधायी एजेंडे से जोड़ने के प्रयासों का विरोध करने, विपक्षी दलों द्वारा संयुक्त अभियान चलाने तथा आगामी चुनावों में अधिक संख्या में महिला उम्मीदवारों को टिकट देने की सार्वजनिक प्रतिबद्धता शामिल है।
कांग्रेस शहरी जिला अध्यक्ष पंकज डावर ने कहा कि इन मांगों से संबंधित ज्ञापन सरकार को भी भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश की राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का औसत प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से भी कम है। अगले एक वर्ष में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करना लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
उन्होंने कहा, “महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए और महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए।”








