-एससी कैटेगरी के पद पर जनरल श्रेणी की नियुक्ति की तैयारी
-04 जून को है इंटरव्यू, 08 जून को ईसी की बैठक में लग सकती है मुहर
-नियमों के साथ-साथ संविधान की भी उड़ाई जा रही धज्जियां
-सरकार इस नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करके तय नियमों से कराए प्रोफेसर की नियुक्ति
गुडग़ांव। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने कहा कि गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में मीडिया विभाग में होने जा रही प्रोफेसर की नियुक्ति में नियम, कायदों का पालन नहीं हो रहा। जिस पद पर एससी कैटेगरी के उम्मीदवार की नियुक्ति होनी चाहिए, उस पद पर जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार को लगाने की तैयारी हो रही है। यह यूनिवर्सिटी के नियमों का तो उल्लंघन है ही, साथ ही एससी कैटेगरी के साथ अन्याय है। संविधान की भी इसमें धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आरक्षण नीति का खुलकर उल्लंघन है।
पंकज डावर ने कहा कि गुरुग्राम यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से आगामी 04 जून 2026 को अपने मीडिया विभाग में प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए इंटरव्यू लेने की तैयारी है। पता चला है कि इस पद पर डा. राकेश योगी नामक शिक्षक की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। यूनिवर्सिटी में 08 जून 2026 को यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक प्रस्तावित है। इसी बैठक में डा. राकेश योगी की नियुक्ति को मंजूरी मिलने की संभावना है। पंकज डावर ने कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष की खिलाफत की बात नहीं कर रहे, बल्कि नियमों के संभावित उल्लंघन की बात कर रहे हैं। अगर एससी पद पर डा. राकेश योगी की नियुक्ति होती है तो यह भी भ्रष्टाचार ही कहा जाएगा। सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने के लाख दावे करती है, मगर यहां भ्रष्टाचार खुलकर होने की संभावना है। पंकज डावर ने कहा कि मीडिया विभाग में यह पद पिछले करीब दो साल से लंबित रखा गया है। इतने लंबे समय तक किसी पद को भरने के लिए फिर से विज्ञापित करना चाहिए था। यूनिवर्सिटी की ओर से ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जिस संभावित प्रोफेसर डा. राकेश योगी को इस पद पर लगाया जाना है, उनकी शैक्षणिक योग्यता और पात्रता भी सवालों के घेरे में है। इसकी भी जांच की जानी चाहिए।
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने कहा कि कथित चर्चा यह भी है कि गुरुग्राम यूनिवर्सिटी की ओर से मीडिया विभाग में प्रोफेसर की भर्ती करने में रोस्टर रजिस्टर प्रक्रिया को भी मैंटेन नहीं किया जा रहा है, जो कि करना जरूरी है। सरकार के यह दिशा-निर्देश भी हैं कि किसी भी नियुक्ति में रोस्टर रजिस्टर का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में अब तक प्रोफेसर के पदों पर हुई नियुक्तियों में सिर्फ जनरल कैटेगरी को प्रमुखता दी गई है। एससी, एससी, ओबीसी की खुलकर अनदेखी की गई है। यह प्रदेश सरकार की आरक्षण नीति और संविधान के खिलाफ है।









