शिक्षा में दोहरी नीति अस्वीकार्य, 1750 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से बकाया भुगतान देने की उठी मांग

चंडीगढ़ , 01 जून – नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने हरियाणा सरकार से मांग की है कि नियम 134-ए शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 12(1)(ग), चिराग योजना तथा अन्य सरकारी योजनाओं के अंतर्गत वर्ष 2015 से लंबित शुल्क प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान तत्काल प्रभाव से किया जाए।
उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों ने सरकार की विभिन्न छात्र हितैषी योजनाओं के अंतर्गत लाखों विद्यार्थियों को निःशुल्क प्रवेश, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। इसके बावजूद सरकार द्वारा वर्षों से विद्यालयों की प्रतिपूर्ति राशि जारी नहीं की जा रही है, जिससे हजारों विद्यालय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन, ईपीएफ, ईएसआई, भवन रखरखाव, परिवहन, बिजली-पानी तथा अन्य खर्च विद्यालय अपने सीमित संसाधनों से वहन कर रहे हैं।

कुलभूषण शर्मा ने मांग की कि सरकार 2014-15 से 134ए योजना के तहत लंबित भुगतान ब्याज सहित तथा आरटीई के अंतर्गत देय समस्त प्रतिपूर्ति राशि शीघ्र जारी करे।तथा RTE अधिकार अधिनियम के तहत यानि ₹ 1750 प्रत्ति माह प्रत्ति छात्र के अनुसार राशि शीघ्र जारी करे इससे स्कूल संचालकों में सरकार के प्रति विश्वास का वातावरण बनेगा तथा ईडब्ल्यूएस वर्ग के बच्चों के प्रवेश में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होगी।
कुलभूषण शर्मा ने कहा कि इससे भी अधिक चिंताजनक विषय यह है कि प्रदेश में सरकारी और निजी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के बीच भेदभाव का वातावरण बनता दिखाई दे रहा है। हाल ही में शिक्षा विभाग द्वारा बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया गया, जो सराहनीय है। किंतु निजी विद्यालयों के उन हजारों मेधावी विद्यार्थियों की पूरी तरह अनदेखी की गई जिन्होंने प्रदेश और देश स्तर पर उत्कृष्ट परिणाम देकर हरियाणा का नाम रोशन किया है।
उन्होंने कहा कि यह भेदभाव संविधान की मूल भावना के भी विपरीत है, जिसमें सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार की बात कही गई है। क्या निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे इस प्रदेश के नागरिक नहीं हैं? क्या उन्हें मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग से समान सम्मान, अवसर और प्रोत्साहन मिलने का अधिकार नहीं है? ऐसे मेधावी विद्यार्थियों की उपेक्षा न केवल उनके मनोबल को प्रभावित करती है बल्कि अभिभावकों के बीच भी गलत संदेश देती है।
शर्मा ने सरकार से आग्रह किया कि वह अपनी इस भूल को तुरंत सुधारे तथा सरकारी और निजी विद्यालयों के सभी विद्यार्थियों को समान दृष्टि से देखकर उन्हें प्रोत्साहित करे, ताकि विकसित भारत के निर्माण में सभी बच्चे समान रूप से योगदान दे सकें।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 15 जून 2026 तक लंबित प्रतिपूर्ति राशि जारी नहीं की गई, तो निजी विद्यालयों और उनके संगठनों को अपने वैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु न्यायालय की शरण लेने तथा अन्य कानूनी कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग की होगी।









