मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर भाजपा का जश्न आम आदमी के जले घावों पर नमक छिड़कने जैसा : विद्रोही

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महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर मोदी सरकार पर साधा निशाना

इलेक्टोरल बॉन्ड, नोटबंदी और आर्थिक नीतियों को बताया जनविरोधी

लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का लगाया आरोप

रेवाडी, 26 मई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष पूरे होने पर भाजपा द्वारा मनाए जा रहे जश्न को महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रही जनता के जले घावों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा किस उपलब्धि का उत्सव मना रही है, यह आम लोगों की समझ से परे है, क्योंकि मोदी सरकार का कार्यकाल आम नागरिकों पर बेहद भारी साबित हुआ है।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में भ्रष्टाचार और लूट ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता के दुरुपयोग के जरिए “चंदा दो-धंधा लो” की नीति अपनाकर भाजपा ने चंदे के नाम पर भारी धनराशि एकत्र की और देशभर में भाजपा-संघ के भव्य कार्यालय बनाए गए। उन्होंने नोटबंदी को देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताते हुए कहा कि इससे आम जनता परेशान हुई जबकि सत्ता से जुड़े लोगों को लाभ मिला।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक बताए जाने के बाद सामने आए तथ्यों से यह स्पष्ट हो गया कि सरकारी ठेके, ईडी, सीबीआई और आयकर छापों के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाकर भारी आर्थिक लाभ उठाया गया। विद्रोही ने आरोप लगाया कि इतने गंभीर आरोपों और तथ्यों के बावजूद अब तक किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई न होना संविधान और कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर जनादेश के साथ खिलवाड़ किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है और करोड़ों लोग मुफ्त राशन पर निर्भर होने को मजबूर हैं। किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ा है तथा आम आदमी की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हुई है।

उन्होंने कहा कि देश पर बढ़ते कर्ज और कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथों में संपत्ति के केंद्रीकरण ने क्रोनी कैपिटलिज्म को बढ़ावा दिया है। विद्रोही ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में हुई आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं की तुलना इतिहास की बड़ी लूटों से की जा सकती है।

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Author: Bharat Sarathi

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