“सोना कम खरीदें, विदेशी यात्राओं में संयम रखें, पेट्रोल-डीजल बचाएं” — प्रधानमंत्री के संदेश पर विपक्ष ने उठाए सवाल
नई दिल्ली, 11 मई 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों को संयमित जीवनशैली अपनाने की दी गई हालिया अपील अब राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री ने जनता से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने, अत्यधिक सोना खरीदने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण रखने तथा संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करने का संदेश दिया है। प्रधानमंत्री के इन बयानों को लेकर जहां भाजपा इसे राष्ट्रहित और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और बढ़ते आर्थिक दबाव का संकेत बता रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाने के लिए नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों पर देश की भारी विदेशी निर्भरता अर्थव्यवस्था पर दबाव डालती है। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि छोटी दूरी के लिए निजी वाहनों का कम उपयोग करें, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दें और ईंधन की बचत को राष्ट्रीय कर्तव्य मानें।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने सोने की अत्यधिक खरीदारी पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से आयात होता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। उन्होंने लोगों से निवेश के वैकल्पिक साधनों की ओर बढ़ने और अनावश्यक सोना खरीदने से बचने की अपील की। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विदेश यात्राओं में आवश्यकता और दिखावे के बीच अंतर समझना जरूरी है तथा देश के भीतर पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में प्रधानमंत्री की इन अपीलों को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। राहुल गाँधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जनता को “कम खर्च करो” का संदेश इसलिए दे रही है क्योंकि देश आर्थिक दबाव, गिरती मांग और बढ़ती महंगाई की स्थिति से गुजर रहा है। विपक्ष का कहना है कि यदि अर्थव्यवस्था मजबूत होती तो सरकार लोगों से पेट्रोल कम जलाने, विदेश यात्रा कम करने और सोना न खरीदने की अपील नहीं करती।
कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि आम आदमी पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और मध्यम वर्ग पर बढ़ते टैक्स बोझ के कारण लोग स्वाभाविक रूप से खर्च कम कर रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की अपील जनता को राहत देने के बजाय “संयम का उपदेश” अधिक प्रतीत होती है।
हालांकि भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री का संदेश वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ऊर्जा संकट और आत्मनिर्भर भारत की सोच से जुड़ा हुआ है। पार्टी नेताओं का दावा है कि प्रधानमंत्री देशवासियों को आर्थिक अनुशासन और जिम्मेदार उपभोग की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों के बीच भी इस विषय पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में तेल आयात और सोने के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है, इसलिए प्रधानमंत्री की अपील आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक है। वहीं कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि जनता खर्च कम करेगी तो बाजार में मांग घट सकती है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
जनता के बीच भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
गुरुग्राम के व्यवसायी संजीव अरोड़ा ने कहा, “प्रधानमंत्री की बात सही है कि देश को आत्मनिर्भर बनना चाहिए, लेकिन आम आदमी पहले ही खर्चों से परेशान है।”
वहीं दिल्ली की गृहिणी कविता शर्मा का कहना है, “सोना भारतीय परिवारों की परंपरा और सुरक्षा का हिस्सा है, इसे केवल विलासिता मानना ठीक नहीं।”
एक कॉलेज छात्र ने कहा कि “विदेश यात्रा हर किसी के लिए शौक नहीं बल्कि पढ़ाई और रोजगार का जरिया भी होती है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह संदेश आने वाले समय में आर्थिक नीतियों, महंगाई और आम आदमी की जीवनशैली को लेकर बड़ी राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है। विपक्ष जहां इसे आर्थिक संकट का संकेत बताने में जुटा है, वहीं सरकार इसे राष्ट्रहित में आवश्यक सामाजिक और आर्थिक अनुशासन का संदेश बता रही है।









