— सुरेश गोयल धूप वाला……..पूर्व जिला महामंत्री, भाजपा, हिसार
हिसार – हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के 71 शहरों में नए आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक सेक्टर विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना वास्तव में “नए हरियाणा” के निर्माण की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, हिसार, पानीपत, सिरसा, यमुनानगर, रोहतक, भिवानी, सोनीपत और डबवाली सहित अनेक शहरों में नियोजित विकास की यह सोच केवल ईंट-पत्थरों के ढांचे खड़े करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक, व्यवस्थित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर शहरी संस्कृति को स्थापित करने का प्रयास है।
आज हरियाणा तीव्र गति से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। गांवों से शहरों की ओर रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन की तलाश में लगातार बढ़ता पलायन आने वाले समय में शहरों पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। यदि समय रहते सुनियोजित शहरी विस्तार नहीं किया गया, तो अवैध कालोनियां, ट्रैफिक जाम, जल संकट, प्रदूषण, जलभराव और आधारभूत सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं और विकराल हो सकती हैं। ऐसे समय में सरकार की यह योजना भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक सकारात्मक पहल प्रतीत होती है।
लेकिन केवल नए सेक्टर बना देना ही पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि इन्हें पारंपरिक “कालोनियों” की बजाय आधुनिक “स्मार्ट और आत्मनिर्भर शहरी इकाइयों” के रूप में विकसित किया जाए। पुराने शहरों और कालोनियों की सबसे बड़ी समस्याएं अव्यवस्थित निर्माण, संकरी सड़कें, बिजली की खुली तारें, बदहाल सीवरेज, जलभराव और पार्कों की कमी रही हैं। नई योजना में इन कमियों से सीख लेकर भविष्य की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देनी होगी।
सौर ऊर्जा बने नई पहचान
नई कॉलोनियों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रत्येक भवन पर सोलर पैनल लगाने की अनिवार्य व्यवस्था की जाए। इससे बिजली पर निर्भरता कम होगी, नागरिकों का खर्च घटेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। यदि हजारों घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होते हैं, तो हरियाणा हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
भूमिगत बिजली व्यवस्था से बढ़ेगी सुरक्षा और सुंदरता
नई शहरी परियोजनाओं में बिजली की सभी केबलों को भूमिगत करना समय की आवश्यकता है। इससे शहरों की सौंदर्यता बढ़ेगी, दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा और आंधी-बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो सकेगी। आधुनिक शहरों की पहचान उनकी सुव्यवस्थित आधारभूत संरचना से होती है।
हरित क्षेत्र बनें विकास का केंद्र
कंक्रीट के जंगल किसी भी शहर को आधुनिक नहीं बनाते। वास्तविक विकास वह है जिसमें प्रकृति और नागरिक जीवन के बीच संतुलन हो। इसलिए नए सेक्टरों में पर्याप्त ग्रीन बेल्ट, पार्क, खुले मैदान और वृक्षारोपण के लिए स्थान सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। बढ़ते प्रदूषण और घटती हरियाली के बीच नागरिकों को स्वस्थ वातावरण देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
आवारा पशु और कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी
आज अधिकांश शहरों में आवारा कुत्ते और बेसहारा पशु नागरिकों की सुरक्षा और स्वच्छता के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। नई कॉलोनियों की योजना बनाते समय पशु प्रबंधन और नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी, ताकि भविष्य में यह समस्या विकराल रूप न ले सके।
सफाई और सीवरेज व्यवस्था हो मजबूत
स्वच्छता किसी भी सभ्य शहर की पहली पहचान होती है। इसलिए नियमित सफाई व्यवस्था, आधुनिक कचरा प्रबंधन प्रणाली और मजबूत सीवरेज नेटवर्क को प्रारंभिक स्तर पर ही विकसित करना आवश्यक है। कई शहरों में बाद में सीवरेज और जलनिकासी की व्यवस्था सुधारने पर भारी खर्च करना पड़ता है। यदि शुरुआत में ही मजबूत व्यवस्था बनाई जाए, तो भविष्य की परेशानियों से बचा जा सकता है।
शुद्ध पेयजल और जलभराव मुक्त शहर
प्रत्येक सेक्टर में आधुनिक जल शोधन संयंत्र स्थापित कर नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाना चाहिए। साथ ही वर्षा जल निकासी की ऐसी वैज्ञानिक और भूमिगत व्यवस्था हो कि बरसात के दौरान सड़कों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न ही न हो। आज गुरुग्राम सहित कई बड़े शहरों में बारिश के बाद जलभराव सबसे बड़ी समस्या बन चुका है।
पारदर्शिता और दूरदर्शिता से ही सफल होगी योजना
यह योजना केवल भवन निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि भविष्य के विकसित और आत्मनिर्भर हरियाणा की आधारशिला है। यदि इसे पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण निर्माण, पर्यावरण संतुलन और आधुनिक तकनीक के साथ लागू किया गया, तो हरियाणा आने वाले वर्षों में देश के सबसे सुव्यवस्थित और आधुनिक राज्यों में अपनी पहचान बना सकता है।
निस्संदेह, यह समय केवल शहर बसाने का नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवनशैली और संतुलित शहरी संस्कृति विकसित करने का है।









