स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार चरम पर, जनता बुनियादी सुविधाओं से वंचित: कुमारी सैलजा

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चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी उठाए सवाल, भाजपा शासन पर साधा निशाना

रेवाड़ी, 06 मई। सिरसा की सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने स्थानीय निकायों में व्याप्त भ्रष्टाचार और बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में स्थानीय निकायों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और आम लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

रेवाड़ी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सैलजा ने कहा कि भाजपा शासन में शहरों को “गंदगी का डिब्बा” बना दिया गया है। उन्होंने विशेष रूप से धारूहेड़ा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यहां के लोग लंबे समय से परेशान हैं और आसपास के क्षेत्रों की गंदगी यहां डाली जा रही है, जो स्थानीय जनता के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश, केंद्र और स्थानीय स्तर पर भाजपा की सरकार होने के बावजूद धारूहेड़ा की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। जनता को हर स्तर पर ठगा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि निकाय चुनाव में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को जनता प्रचंड बहुमत से विजयी बनाएगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी।

सैलजा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार स्थानीय निकायों की समस्याओं के समाधान में पूरी तरह विफल रही है। शहरों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है, भ्रष्टाचार बढ़ा है और आम नागरिक मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाती है, जबकि बड़े आरोपियों को संरक्षण दिया जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के कई नगर निगमों में करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आए हैं, लेकिन जांच के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है। प्रॉपर्टी आईडी, विकास कार्यों और टेंडर प्रक्रिया में भी अनियमितताओं के आरोप लगातार लग रहे हैं।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सैलजा ने कहा कि पूरी चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता नजर नहीं आई। उन्होंने यह भी कहा कि निर्दलीय प्रत्याशी द्वारा कांग्रेस को दिया गया समर्थन पार्टी को और मजबूती देगा।

भजनलाल पर टिप्पणी को बताया निंदनीय

सैलजा ने भाजपा नेताओं द्वारा दिवंगत चौधरी भजनलाल पर की गई टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भजनलाल हरियाणा के वरिष्ठ और जनप्रिय नेता थे, जिन्हें प्रदेश के निर्माताओं में गिना जाता है। ऐसे व्यक्तित्व पर इस प्रकार की भाषा का प्रयोग सार्वजनिक जीवन की गरिमा के विपरीत है।

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Author: Bharat Sarathi

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