आचार्य डॉ महेन्द्र शर्मा “महेश”

पानीपत/नई दिल्ली। सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) को अत्यंत पवित्र और दुर्लभ माना गया है। वर्ष 2026 में यह मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। यह मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे आध्यात्मिक साधना, तप, दान और भक्ति के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है।
🔶 पुरुषोत्तम मास का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर बढ़ते-बढ़ते करीब 33 महीने में एक अतिरिक्त मास बनता है, तब उसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
- सौर वर्ष: 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 11 सेकंड
- चंद्र वर्ष: 354 दिन 8 घंटे 48 मिनट 34 सेकंड
इस अंतर को संतुलित करने के लिए यह मास जोड़ा जाता है, जिससे पर्व और ऋतुओं में स्थिरता बनी रहती है।
🔶 पौराणिक कथा: भक्त प्रह्लाद और नृसिंह अवतार
पुराणों के अनुसार, जब असुरराज हिरण्यकशिपु ने कठोर तप कर ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया और अत्याचारी बन गया, तब उसके पुत्र भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार धारण किया।
यह अवतार उस वरदान को भी खंडित नहीं करता और भक्त की रक्षा भी करता है—
- न दिन में, न रात में
- न घर में, न बाहर
- न अस्त्र से, न शस्त्र से
इसी दिव्य लीला को पुरुषोत्तम मास की महिमा से जोड़ा जाता है, जहां भगवान अपने भक्त के लिए नियमों से परे भी कार्य करते हैं।
🔶 इस मास में क्या करें और क्या नहीं
✔️ क्या करें:
- भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना
- विष्णु पुराण, भागवत कथा, पुरुषोत्तम माहात्म्य का श्रवण
- दान, तीर्थयात्रा, जप-तप
- सात्विक भोजन और एक समय भोजन (एकनक्त व्रत)
- भूमि पर शयन और ब्रह्मचर्य का पालन
❌ क्या न करें:
इस मास में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, जैसे—
- विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन
- नया वाहन या आभूषण खरीदना
- शिलान्यास, भूमिपूजन
- गर्भाधान, नामकरण आदि संस्कार
🔶 मलमास क्यों कहा जाता है?
पुरुषोत्तम मास को मलमास भी कहा जाता है क्योंकि इस दौरान सूर्य संक्रांति नहीं होती।
अर्थात, यह एकमात्र ऐसा चंद्र मास होता है जिसमें कोई संक्रांति नहीं पड़ती।
🔶 विशेष पर्व और प्रभाव
- गंगा दशहरा: 26 मई 2026
- इस मास के समाप्त होने के बाद आने वाले सभी व्रत-त्योहार लगभग 19 दिन विलंब से होंगे
🔶 आध्यात्मिक संदेश
पुरुषोत्तम मास यह संदेश देता है कि
👉 “भगवान और भक्त एक-दूसरे के पूरक हैं।”
भगवान अपने सच्चे भक्त के लिए किसी भी नियम को बदल सकते हैं। यह मास आत्मशुद्धि, संयम और ईश्वर के प्रति समर्पण का सर्वोत्तम अवसर है।








