लापरवाही पर अधिकारियों को भी नोटिस, किसानों से अवशेष प्रबंधन अपनाने की अपील

गुरुग्राम, 1 मई। डीसी उत्तम सिंह ने जिले में गेहूं के फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर सख्ती बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी ऐसी घटना की सूचना मिलते ही तुरंत प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अवशेष जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं, ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। डीसी शुक्रवार को लघु सचिवालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
बैठक में उन्होंने जिले के चिन्हित क्षेत्रों में अवशेष जलाने की घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए कृषि विभाग को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में बिना देरी एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर संबंधित किसानों की रेड एंट्री की जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई किसान अवशेष जलाते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माना, एफआईआर और पोर्टल पर रेड एंट्री जैसी कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाएगी। डीसी ने बताया कि रेड एंट्री होने की स्थिति में संबंधित किसान आगामी दो वर्षों तक अपनी फसल मंडी में नहीं बेच सकेगा और कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने से भी वंचित रहेगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कृषि विभाग की फील्ड विजिट टीमें यदि समय पर कार्रवाई नहीं करती हैं, तो संबंधित अधिकारियों को भी शो कॉज नोटिस जारी किया जाए।
डीसी ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे फसल अवशेष जलाने के बजाय उपलब्ध कृषि यंत्रों का अधिक से अधिक उपयोग करें और अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित योजनाओं के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि वे वैकल्पिक उपाय अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।
बैठक में कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ अनिल तंवर, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रिय अधिकारी सिद्धार्थ एवं आकांक्षा तंवर मौजूद रहे।








