महंगी गैस, महंगी थाली: कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से आम आदमी पर डबल मार

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वर्धन यादव का आरोप—चुनाव के बाद बढ़ाई गई कीमतें, छोटे कारोबारियों से लेकर मजदूर तक होंगे प्रभावित

गुरुग्राम, 1 मई। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ताजा बढ़ोतरी ने एक बार फिर महंगाई के मुद्दे को गर्मा दिया है। इस बढ़ोतरी का असर केवल गैस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम आदमी की थाली से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक साफ दिखाई देगा। चाय की दुकानों, ढाबों, रेहड़ी-पटरी और छोटे होटलों पर इसका सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष वर्धन यादव ने इस मूल्य वृद्धि को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में अचानक हुई बढ़ोतरी आम लोगों की कमर तोड़ने वाली है। उनका आरोप है कि सरकार चुनाव के दौरान राहत देने का दिखावा करती है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कीमतों में भारी इजाफा कर दिया जाता है।

वर्धन यादव के अनुसार, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में एक ही दिन में करीब 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जो हाल के समय की सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि फरवरी से अब तक कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 1380 रुपये तक की वृद्धि हो चुकी है, यानी तीन महीनों में करीब 81 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उन लोगों की जेब पर पड़ेगा जो रोजाना बाजार पर निर्भर हैं या छोटे स्तर पर अपना व्यवसाय चलाते हैं। मजदूर दिवस के अवसर पर इस तरह की बढ़ोतरी को उन्होंने सरकार की संवेदनहीनता करार दिया।

वर्धन यादव के मुताबिक, सबसे ज्यादा असर ठेला लगाने वाले, रेहड़ी-पटरी संचालक, छोटे ढाबा मालिक और प्रवासी मजदूरों पर पड़ेगा। इन वर्गों के लिए रसोई का खर्च बढ़ेगा, जिसका बोझ अंततः आम ग्राहकों को उठाना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि कमर्शियल गैस महंगी होने का असर केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं रहता। जब होटल, ढाबे और फूड स्टॉल महंगे होंगे, तो बाहर खाने की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे आम आदमी के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

अंत में वर्धन यादव ने केंद्र सरकार से मांग की कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतों को तुरंत वापस लिया जाए, ताकि छोटे कारोबारियों और आम जनता को राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महंगाई पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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