स्पीकर का नोटिस लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ, भाजपा एजेंडा लागू करने का आरोप: विद्रोही

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स्पीकर की कार्रवाई पर उठे निष्पक्षता के सवाल, विशेष सत्र को भी बताया असंवैधानिक

चंडीगढ़, 29 अप्रैल 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायक दल द्वारा चलाए गए समानांतर मॉक अधिवेशन पर स्पीकर हरविन्द्र कल्याण द्वारा नेता प्रतिपक्ष भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को नोटिस जारी करने की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत और “पार्टी राजनीति से प्रेरित” कदम करार दिया।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि स्पीकर हरविन्द्र कल्याण निष्पक्ष और स्वतंत्र भूमिका निभाने के बजाय भाजपा के एजेंट की तरह कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्पीकर का आचरण लगातार पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण रहा है, जो विधानसभा की गरिमा के अनुकूल नहीं है।

उन्होंने कहा कि 27 अप्रैल को कांग्रेस द्वारा विशेष सत्र का बहिष्कार कर समानांतर मॉक विधानसभा की कार्यवाही चलाना कोई नई बात नहीं है। संसद और देश की विभिन्न विधानसभाओं में विपक्ष पहले भी इस प्रकार का विरोध करता रहा है। यहां तक कि हरियाणा में कांग्रेस शासन के दौरान भाजपा भी कई बार ऐसी रणनीति अपना चुकी है।

विद्रोही ने सवाल उठाया कि स्पीकर को इस मामले में नेता प्रतिपक्ष को नोटिस जारी करने की क्या आवश्यकता थी, जबकि पूर्व की परंपराओं के अनुसार वे इसे नजरअंदाज भी कर सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से स्पीकर ने अपनी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और भाजपा के प्रति निष्ठा प्रदर्शित की है।

उन्होंने यह भी कहा कि 27 अप्रैल को बुलाया गया विशेष सत्र, जिसमें परिसीमन विधेयक के मुद्दे को महिला आरक्षण से जोड़कर कांग्रेस की आलोचना की गई, वह स्वयं ही असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक था। विद्रोही के अनुसार, संसद में किसी विधेयक का समर्थन या विरोध करना निर्वाचित सांसदों का संवैधानिक अधिकार है, जिसे किसी विधानसभा या सत्तारूढ़ दल द्वारा चुनौती नहीं दी जा सकती।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि परिसीमन विधेयक के गिरने को महिला आरक्षण के विरोध के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक और अनैतिक है, क्योंकि महिला आरक्षण कानून आज भी संविधान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि संसद के निर्णयों पर किसी विधानसभा में निंदा प्रस्ताव लाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

अंत में उन्होंने सवाल किया कि यदि इन तथ्यों के बावजूद 27 अप्रैल को बुलाया गया हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक नहीं था, तो फिर उसे किस श्रेणी में रखा जाएगा।

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Author: Bharat Sarathi

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