-भारतीय ग्रंथों का विश्व स्तर पर महत्व-सनातन दर्शन और आधुनिक दर्शन पर हुई संगोष्ठी

गुरुग्राम। यहां न्यू कालोनी स्थित गीता भवन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद गुरुग्राम शाखा, पंजाबी बिरादरी महासंगठन गुरुग्राम और केंद्रीय श्री सनातन धर्म सभा गुरुग्राम एक संगोष्ठी आयोजित की गई। गीता और अन्य भारतीय ग्रंथों का विश्व स्तर पर महत्व-सनातन दर्शन और आधुनिक दर्शन इस संगोष्ठी का विषय रहा। इसमें शिरकत करने वाले आम और खास लोगों की मौजूदगी से संगोष्ठी आध्यात्मिक चेतना का भी परिचायक बन गई।
इस अवसर पर मुख्य सानिध्य महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी महाराज का रहा। मुख्य वक्ता के रूप में समाज सेवी एवं प्रसिद्ध उद्योगपति बोध राज सीकरी ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के मुखिया एवं पूर्व राजदूत विनोद ने और उनके साथी त्रिलोकी नाथ मल्होत्रा ने की। केंद्रीय श्री सनातन धर्म सभा के प्रधान समाजसेवी सुरेंद्र खुल्लर द्वारा समापन, ओम प्रकाश जी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव और ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अलका शर्मा की गरिमामयी मौजूदगी रही। आयुर्वेदाचार्य डॉ. परमेश्वर अरोड़ा का भी संबोधन अत्यन्त सराहनीय रहा। मंच संचालन ज्ञान के भंडार डॉक्टर अशोक दिवाकर ने किया। ओम प्रकाश कथूरिया प्रधान और प्रमोद सलूजा वरिष्ठ उप-प्रधान पंजाबी बिरादरी महासंगठन की विशेष मौजूदगी रही।

महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी के आशीर्वाद और उनके वक्तव्य ने न केवल गीता, बल्कि अन्य भारतीय ग्रंथों की प्रासंगिकता को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सिद्ध किया। उनके वचनों ने 400 से अधिक उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वामी जी की ओर से संगोष्ठी में यह स्पष्ट संदेश गया है कि सनातन दर्शन और वैदिक परंपराएं ही आधुनिक जीवन की जटिलताओं का समाधान हैं।
बोधराज सीकरी ने गहराई से ज्वलंत उदाहरण पेश किए। उन्होंने मौजूद लोगों में समाज को समर्पित करने (इदं न मम) की भावना जागृत की। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवन्तु सुखिन: के मूल मंत्रों पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह संदेश किसी जाति या देश विशेष के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता और विश्व शांति (अंतरिक्ष शांति, पृथ्वी शांति) के लिए था। भारी संख्या में महिलाओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। डॉ. परमेश्वर अरोड़ा के धारावाहिक विचारों ने इस आध्यात्मिक चर्चा को व्यावहारिक जीवन से जोडऩे का काम किया। इदं न मम (यह मेरा नहीं है) का भाव और समर्पण की जो लौ आज प्रज्वलित हुई है, वह निश्चित रूप से समाज में एक सकारात्मक और भारी परिवर्तन लेकर आएगी।
सभी आर्य समाज की केंद्रीय सभा के प्रधान अशोक आर्य, परोपकारी सभा के मंत्री कन्हैया लाल आर्य, समाजसेवी तिलक राज मल्होत्रा का संक्षिप्त संबोधन, विभिन्न मंदिरों के प्रधान, पंजाबी बिरादरी महासंगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी राम लाल ग्रोवर, गजेंद्र गोसाई, संदीप कुमार, किशोरी लाल डुडेजा, रमेश कामरा, युधिष्ठिर अलमादी, अनिल कुमार, सौरव सचदेवा, शेखर तनेजा, राजीव छाबड़ा, अजय भार्गव, जगदीश ग्रोवर, हेमंत मोंगिया, वासदेव ग्रोवर, रमेश मुंजाल, योगाचार्य राजपाल आहूजा,रमेश चुटानि, सुभाषअरोरा, नरेश चावला, सतीश आहूजा, सुभाष गांधी, सुभाष नागपाल, रवि, धर्मेंद्र बजाज, यशपाल ग्रोवर, रमेश मुंजाल, महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका ज्योत्सना बजाज, सह संयोजिका रचना बजाज, ऊष्मा सचदेवा, तारा टुटेजा, गीता चूटानी, वीणा अरोड़ा समारोह में मौजूद रहे।








