सजग विद्यार्थी और गीता पर मंथन, कुरुक्षेत्र में मासिक परिचर्चा संपन्न

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गीता के सिद्धांतों को जीवन में उतारने पर दिया जोर, युवाओं को सक्रिय सहभागिता के लिए किया प्रेरित

थानेसर, 28 अप्रैल, (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी) : ‘‘श्रीमद्भगवद्गीता – अद्वितीयम् अद्भुतम’’ विषयक मासिक बौद्धिक परिचर्चा का आयोजन गुलजारी लाल नन्दा केन्द्र कुरुक्षेत्र में किया गया। वैशाख शुक्ल एकादशी के पावन अवसर पर विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड तथा गुलजारी लाल नन्दा केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘सजग विद्यार्थी और गीता’’ विषय पर सारगर्भित विचार-विमर्श सकारात्मक वातावरण में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान की अध्यक्षा डॉ. ममता सचदेवा एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। केन्द्र की निदेशक प्रो. शुचिस्मिता ने प्रबुद्ध सभा का स्वागत करते हुए परिचर्चा की रूपरेखा प्रस्तुत की।

परिचर्चा के प्रणेता एवं हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के संस्कृत प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. चित्तरंजन दयाल सिंह कौशल ने अपने विचार रखते हुए वर्तमान चुनौतियों से उबरने के लिए गीता के सिद्धांतों को जीवन में उतारने पर बल दिया।

श्रीमद्भगवद्गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कुरुक्षेत्र के निदेशक अनिल कुलश्रेष्ठ ने डॉ. कौशल का परिचय प्रस्तुत किया तथा उनका सम्मान किया गया। विद्या भारती उत्तर क्षेत्र के प्रकाशन संयोजक बलबीर ने अपने उद्बोधन की शुरुआत गीता के श्लोक से करते हुए समापन शांति मंत्र के साथ किया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्थान के प्रबंधक सुधीर कुमार ने कहा कि जहां पश्चिमी शिक्षा प्रणाली मस्तिष्क का विकास करती है, वहीं भारतीय आचार्य मस्तिष्क के साथ हृदय का भी निर्माण करते हैं। उन्होंने ऐसे शिक्षकों की आवश्यकता पर बल दिया जो गीता को केवल पढ़ाएं ही नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में भी अपनाएं।

कृष्ण कुमार भण्डारी ने युवाओं को झिझक छोड़कर विचार-विमर्श में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया और समाज के विभिन्न वर्गों तक इन विचारों को पहुंचाने का आह्वान किया।

परिचर्चा के इस चौथे संस्करण में प्रो. देसवाल, डॉ. जय भगवान सिंगला, डॉ. रामचन्द्र, प्रो. कृष्णा देवी, संत कुमार, सतीश सैनी, सुश्री आशा, डॉ. भरद्वाज, अरुण पाराशर, सुश्री सुदेश, डॉ. कृष्ण कुमार मिश्र, डॉ. कुलदीप, डॉ. विद्याव्रत, देवराज सहित अनेक गणमान्य प्रबुद्धजन उपस्थित रहे और सक्रिय सहभागिता निभाई।

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Author: Bharat Sarathi

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