🔹 मल्टी स्टोरी कम्युनिटी सेंटर के प्रस्ताव के खिलाफ सैकड़ों नागरिकों ने सौंपा ज्ञापन
🔹 हजारों पेड़ों और हरियाली पर संकट, 600 से अधिक लोगों के हस्ताक्षर से गूंजा विरोध

गुरुग्राम, 27 अप्रैल 2026। शहर के ऐतिहासिक और जीवनदायिनी हरित क्षेत्र कमला नेहरू पार्क को बचाने के लिए अब आमजन की आवाज बुलंद हो चुकी है। पर्यावरण प्रेमियों, बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने एकजुट होकर प्रस्तावित मल्टी स्टोरी सामुदायिक केंद्र के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया और माननीय मुख्यमंत्री को उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
करीब 1960 से पहले अस्तित्व में आए इस पार्क को गुरुग्राम का “हरा दिल” माना जाता है, जहां हजारों पेड़-पौधे, फूलों की क्यारियां और प्राकृतिक वातावरण लोगों को न केवल सुकून देता है, बल्कि स्वास्थ्य का आधार भी है। हर दिन सैकड़ों बुजुर्ग यहां सैर करते हैं, महिलाएं योग करती हैं, युवा व्यायाम करते हैं और बच्चे खेलते हैं—यानी यह पार्क सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीवन की धड़कन है।
लेकिन अब इस धड़कन पर संकट मंडरा रहा है। नगर निगम द्वारा यहां 3 मंजिला बेसमेंट पार्किंग सहित डबल स्टोरी कम्युनिटी सेंटर बनाने का प्रस्ताव सामने आया है, जिससे हजारों पेड़ों की कटाई और हरियाली के विनाश का खतरा उत्पन्न हो गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले ही पार्क की जमीन का बड़ा हिस्सा स्विमिंग पूल विस्तार और बिजली कार्यालय के लिए लिया जा चुका है। ऐसे में अब और निर्माण कार्य इस हरित क्षेत्र को पूरी तरह खत्म कर देगा।
“यह सिर्फ पार्क नहीं, हमारी सांसों का सहारा है”
भावुक होते हुए एक बुजुर्ग ने कहा, “अगर यह पार्क खत्म हुआ, तो हमारी सुबह की ताजगी और जीवन की ऊर्जा भी खत्म हो जाएगी।”
जैकबपुरा, सुभाष नगर, जवाहर नगर, पटेल नगर, शिवाजी नगर समेत दर्जनों कॉलोनियों के लोगों ने एक सुर में कहा कि घनी आबादी वाले इस इलाके में यही एकमात्र बड़ा हरित क्षेत्र है, जिसे किसी भी कीमत पर बचाया जाना चाहिए।
600+ हस्ताक्षरों के साथ विरोध दर्ज
करीब 600-700 लोगों के हस्ताक्षरों के साथ पर्यावरण बचाओ प्रेमियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त गुरुग्राम से मिलकर ज्ञापन सौंपा। इसके अलावा नगर निगम की मेयर, कमिश्नर, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, राष्ट्रीय हरित अधिकरण और वन विभाग को भी शिकायत भेजी गई है।
बिना सर्वे के लिया गया फैसला?
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि यह प्रस्ताव बिना किसी ठोस सर्वे के आगे बढ़ाया गया और जनभावनाओं की अनदेखी करते हुए इसे मंजूरी दी गई। अब लोग अपने जनप्रतिनिधियों से सीधे मिलकर इस फैसले को रद्द कराने की मांग करेंगे।
“हरियाली बचेगी, तभी जिंदगी बचेगी”
इस विरोध में शामिल प्रताप सिंह कदम, गुरदयाल सिंह वालिया, सी.पी. शर्मा, इंद्रेश गुप्ता, अनिल कुमार गुप्ता (एडवोकेट), देवेंद्र जिंदल सहित अनेक पर्यावरण प्रेमियों ने स्पष्ट कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक पार्क की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।
शहर की सांसें बचाने की इस मुहिम में अब आमजन सड़कों पर उतरने को भी तैयार हैं। सवाल सीधा है—क्या विकास के नाम पर हरियाली की बलि दी जाएगी, या फिर प्रकृति को उसका हक मिलेगा?







