महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा का ‘निंदा प्रस्ताव’ लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन: विद्रोही

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कांग्रेस की अनुपस्थिति में प्रस्ताव पारित करना संविधान और परंपराओं के खिलाफ बताया

चंडीगढ़/रेवाडी, 28 अप्रैल 2026 – स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की अनुपस्थिति में भाजपा सरकार द्वारा परिसीमन बिल को महिला आरक्षण बिल बताकर निंदा प्रस्ताव पारित करने को लोकतांत्रिक मर्यादाओं और परंपराओं का उल्लंघन बताया है।

विद्रोही ने कहा कि संसद में परिसीमन से संबंधित 131वां संविधान संशोधन विधेयक का गिरना एक वैधानिक प्रक्रिया थी, लेकिन उसे कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में प्रयोग करना और महिला आरक्षण का नाम देकर विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पारित करना लोकतंत्र और संविधान का मजाक बनाना है। उन्होंने इसे हरियाणा विधानसभा के इतिहास में “काले अक्षरों में दर्ज होने वाला कृत्य” करार दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की अनुपस्थिति में उसके खिलाफ महिला आरक्षण के नाम पर निंदा प्रस्ताव पारित करना न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं से खिलवाड़ है, बल्कि देश के लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास भी है।

विद्रोही ने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में महिला आरक्षण के प्रति गंभीर होती, तो हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस द्वारा दिए गए उस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित करती, जिसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ को वर्ष 2029 से लागू करते हुए लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का सुझाव दिया गया था।

उन्होंने कहा कि ऐसा प्रस्ताव पारित होने से संसद में महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन का रास्ता खुल सकता था और 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 181 सीटें आरक्षित करने की दिशा में ठोस पहल होती।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा ने ऐसा न करके महिला आरक्षण के नाम पर महिलाओं को भावनात्मक रूप से गुमराह करने और वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह रवैया दर्शाता है कि वह महिला आरक्षण के मुद्दे पर गंभीर नहीं है, बल्कि केवल राजनीतिक लाभ के लिए बयानबाजी कर रही है।

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Author: Bharat Sarathi

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