महिला विषयक समिति के गठन को सर्वसम्मति से मंजूरी
9 सदस्यों में 5 महिलाएं, चेयरपर्सन भी महिला सदस्य होंगी

चंडीगढ़, 27 अप्रैल – हरियाणा विधान सभा ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल करते हुए महिला विषयक समिति के गठन को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की है। यह निर्णय सोमवार को आयोजित विशेष सत्र के दौरान, विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण की अध्यक्षता में लिया गया।
इस संबंध में प्रदेश सरकार के संसदीय कार्यमंत्री महिपाल ढांडा द्वारा प्रस्तुत सरकारी संकल्प को सदन ने सर्वसम्मति से पारित किया। यह समिति हरियाणा विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 279-एफ के अंतर्गत गठित की जाएगी।
विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि इस समिति में अधिकतम 9 सदस्य होंगे, जिनमें से 5 सदस्य महिलाएं होंगी। विशेष रूप से, समिति की चेयरपर्सन भी महिला सदस्य ही होंगी, जिससे महिला नेतृत्व को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
यह समिति हरियाणा राज्य महिला आयोग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदनों का परीक्षण करेगी तथा महिलाओं की समानता, प्रतिष्ठा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की गहन समीक्षा करेगी।

इसके अतिरिक्त समिति शिक्षा, स्थानीय निकायों, सरकारी सेवाओं एवं अन्य क्षेत्रों में महिलाओं के पर्याप्त प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए किए गए प्रयासों का भी मूल्यांकन करेगी। समिति महिलाओं की स्थिति और परिस्थितियों में सुधार के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए उपायों पर अपने सुझावों सहित विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी। साथ ही महिलाओं के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं की कार्यप्रणाली और उन पर की गई कार्रवाई की भी समीक्षा करेगी।
समिति को यह अधिकार भी होगा कि वह ऐसे अन्य विषयों पर विचार करे, जिन्हें वह स्वयं उपयुक्त समझे या जिन्हें सदन अथवा अध्यक्ष द्वारा विशेष रूप से संदर्भित किया जाए। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि समिति दिन-प्रतिदिन के प्रशासनिक कार्यों की जांच या अन्वेषण नहीं करेगी।
इस संबंध में विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि समितियां जनहित के कार्यों को सिद्ध करने का एक सशक्त और प्रभावशाली माध्यम हैं। इसी श्रृंखला में आज विधान सभा में भी ‘महिला सशक्तीकरण समिति’ का गठन किया जाना एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि इस समिति का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष योजना ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अंतर्गत विधानमंडलों में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया गया है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में भी भारत जैसे विविधता-भरे देश में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने के प्रयासों को और गति देने की बात कही गई है।
इसके साथ ही विधान सभा अध्यक्ष ने 2025 में आयोजित ’11वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ’ (सीपीए) सम्मेलन में पारित संकल्प का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि हमारे देश की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा युवाओं और महिलाओं का है इसलिए लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनकी और अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विधायी संस्थाओं आवश्यक प्रयास करने चाहिए।
विस अध्यक्ष कल्याण ने कहा कि 2025 के भारतीय विधानमंडलों की महिला सशक्तीकरण एवं कल्याण समितियों के अध्यक्षों के सम्मेलन में भी इस संबंध में संकल्प पारित किया गया है। इस संकल्प में इस बात पर बल दिया गया है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मैनुअल, हैंडबुक और प्रशिक्षण जैसी क्षमता निर्माण पहलों को बढ़ावा देने से जेंडर बजटिंग में तकनीकी विशेषज्ञता सुदृढ़ हुई है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस कमेटी गठन को नारी सशक्तीकरण के लिए मील का पत्थर बताया और कहा कि विस अध्यक्ष का यह कदम सराहनीय है।






