राजेश श्रीवास्तव

शुक्रवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की तथाकथित ‘वॉशिंग मशीन’ एक बार फिर चर्चा में रही, जब विपक्ष के कई नेताओं के पार्टी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं। विशेष रूप से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के एक बड़े समूह के भाजपा में जाने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
इनमें अशोक मित्तल का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, जिन्हें पार्टी ने पहले काफी महत्व दिया था। उन्हें राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में उपनेता बनाया गया था। इतना ही नहीं, पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी उनके आवास पर रह चुके थे। ऐसे में उनका संभावित रुख बदलना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
15 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अशोक मित्तल और उनके बेटे के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में की गई। इसी क्रम में पंजाब के मंत्री संजీవ अरोड़ा के ठिकानों पर भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई हुई।
आम आदमी पार्टी ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक दबाव का हिस्सा बताया और आरोप लगाया कि भाजपा जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को कमजोर करने के लिए कर रही है। वहीं, भाजपा की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया जाता रहा है।
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच संजय सिंह जैसे नेता पार्टी के साथ डटे हुए हैं, जबकि अन्य नेताओं के रुख को लेकर अटकलें जारी हैं। इसी तरह, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, बलबीर सिंह सीचेवाल और विक्रमजीत सिंह साहनी के नाम भी संभावित बदलाव की चर्चाओं में शामिल बताए जा रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह घटनाक्रम आगे बढ़ता है, तो पंजाब की राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ सकता है, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों में।
दूसरी ओर, संदीप पाठक जैसे नेताओं के बयान इस राजनीतिक बदलाव को वैचारिक रूप देने की कोशिश करते दिखते हैं। उन्होंने भाजपा में जाने को “देश सेवा” से जोड़कर पेश किया।
दरअसल, अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी की चर्चाएं पहले से ही चल रही थीं, जिसने इन अटकलों को और हवा दी है।
यह भी उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी के गठन के बाद से ही कई प्रमुख नेता पार्टी से अलग होते रहे हैं। इनमें अन्ना हजारे, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास, शाजिया इल्मी, आशुतोष, कपिल मिश्रा और अलका लांबा जैसे नाम शामिल हैं।







