27 अप्रैल को प्रस्तावित सत्र को बताया राजनीतिक नौटंकी, महिला आरक्षण व परिसीमन मुद्दे पर केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
रेवाडी, 23 अप्रैल 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने 27 अप्रैल को प्रस्तावित हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र को लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सत्र कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन की निंदा करने के उद्देश्य से बुलाया जा रहा है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
विद्रोही ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे की आड़ में केंद्र की मोदी-भाजपा सरकार मनमाने परिसीमन के जरिए लंबे समय तक सत्ता पर काबिज रहने की रणनीति बना रही थी। उन्होंने दावा किया कि संसद में लाया गया 131वां संविधान संशोधन इसी योजना का हिस्सा था, जिसे कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने विपक्षी एकता दिखाते हुए असफल कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस असफलता के बाद भाजपा देशभर में झूठा प्रचार कर रही है कि कांग्रेस और राहुल गांधी ने महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने दिया, जबकि वास्तविकता यह है कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही संसद द्वारा पारित किया जा चुका है और 16 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति की अधिसूचना के बाद यह कानून बन चुका है।
विद्रोही ने सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण कानून लागू हो चुका है, तो केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के बजाय जनता को भ्रमित क्यों कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में विशेष सत्र बुलाकर कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करना एक “प्रायोजित अभियान” है, जिसका उद्देश्य जनता और विशेष रूप से महिलाओं को गुमराह करना है।
उन्होंने यह भी कहा कि 27 अप्रैल को हरियाणा में बुलाया गया विधानसभा सत्र राज्य की जनता को भ्रमित करने का प्रयास है और यह लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने वाला कदम है। विद्रोही के अनुसार, सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा अनैतिक हथकंडे अपनाते हुए झूठ का सहारा ले रही है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।









