गुरुग्राम (भारत सारथी): सेक्टर-9बी स्थित Educrest International School की प्रिंसिपल की गिरफ्तारी को भले ही बड़ी कार्रवाई बताया जा रहा हो, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर और चिंताजनक है। यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में फैले उस नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जहां बिना मान्यता के शिक्षा का धंधा खुलेआम चल रहा है।
शहर में ऐसे सैकड़ों स्कूल और कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, जिनके पास न तो वैध मान्यता है और न ही न्यूनतम शैक्षणिक मानकों का पालन—फिर भी अभिभावक अनजाने में अपने बच्चों का भविष्य इनके भरोसे छोड़ने को मजबूर हैं।
प्रशासन पर उठे बड़े सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन अब तक क्या कर रहा था? क्या इन स्कूलों के बाहर लगे बड़े-बड़े बोर्ड, आकर्षक विज्ञापन और खुलेआम चल रहे एडमिशन कैंप अधिकारियों की नजर से दूर थे? या फिर यह अनदेखी किसी और वजह से हो रही थी?
अगर कार्रवाई केवल शिकायत मिलने पर ही होती है, तो फिर निगरानी तंत्र का अस्तित्व ही क्या है? शिक्षा विभाग के पास क्या कोई सक्रिय निरीक्षण व्यवस्था नहीं बची?
‘फर्जी मान्यता’ का फैलता जाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई संस्थान वर्षों से बिना मान्यता के चल रहे हैं। यहां:
- फर्जी बोर्ड के नाम पर दाखिले किए जाते हैं
- मोटी फीस वसूली जाती है
- रिजल्ट और प्लेसमेंट के झूठे दावे किए जाते हैं
सब कुछ खुलेआम होता है, लेकिन कार्रवाई नाममात्र की। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी नाकामी को दर्शाता है।
क्या है चुप्पी की वजह?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी ताकतें हैं, जिनके सामने प्रशासन कार्रवाई करने से हिचकता है?
क्या इसके पीछे:
- राजनीतिक संरक्षण
- प्रभावशाली लोगों का दबाव
- या विभागीय मिलीभगत
जैसी वजहें काम कर रही हैं?
अगर ऐसा नहीं है, तो फिर सभी संदिग्ध संस्थानों की सूची बनाकर एक साथ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
सिर्फ एक कार्रवाई से नहीं बदलेगा सिस्टम
एक स्कूल पर कार्रवाई को उपलब्धि बताकर प्रचार करना आसान है, लेकिन बाकी संस्थानों पर चुप्पी साध लेना कई सवाल खड़े करता है। जब तक पूरे नेटवर्क पर एक साथ शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक यह फर्जीवाड़ा जारी रहेगा।
अब जवाबदेही का वक्त
जरूरत है:
- व्यापक स्तर पर जांच अभियान
- नियमित और सख्त निरीक्षण
- बिना भेदभाव के कार्रवाई
तभी शिक्षा के नाम पर हो रहे इस खेल पर रोक लग सकेगी।
अब प्रशासन को जवाब देना होगा—आखिर कब तक बच्चों के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ चलता रहेगा? और कब उन सभी फर्जी संस्थानों पर ताला लगेगा, जो शिक्षा के नाम पर धोखा बेच रहे हैं?









