चुनावों के बीच राष्ट्र संबोधन को बताया आचार संहिता का उल्लंघन, चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग
रेवाडी, 19 अप्रैल 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि मनमाना परिसीमन कर लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के कथित षड्यंत्र के तहत लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बौखला गए हैं और सत्ता के दुरुपयोग की सीमाएं लांघ रहे हैं।
विद्रोही ने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के बीच प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन देना बौखलाहट का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबोधन में सरकारी संसाधनों का उपयोग कर कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी पर राजनीतिक हमले किए गए, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि यह कदम आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है और यदि चुनाव आयोग इस मामले में प्रधानमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उचित कार्रवाई नहीं करता, तो यह उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करेगा। विद्रोही के अनुसार, देश के लोकतांत्रिक इतिहास में पहले कभी किसी प्रधानमंत्री ने चुनावों के दौरान इस प्रकार पद का दुरुपयोग नहीं किया।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर विद्रोही ने कहा कि प्रधानमंत्री जिस बिल के गिरने का आरोप विपक्ष पर लगा रहे हैं, वह पहले से ही कानून के रूप में मौजूद है। उन्होंने बताया कि विपक्ष ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि यदि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव लाया जाता है, तो वह इसके समर्थन के लिए तैयार है।
इस संदर्भ में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सरकार को महिला आरक्षण कानून में संशोधन कर 181 सीटें आरक्षित करने का सुझाव दिया है और इसके लिए पूर्ण सहयोग देने की बात कही है।
विद्रोही ने कहा कि जब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत मतदान में 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिर गया, तो सरकार को इसे स्वीकार करना चाहिए था। इसके बजाय इस मुद्दे पर भावनात्मक और राजनीतिक बयानबाजी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।









