कोटक बैंक समेत तीन घोटालों में सीबीआई जांच की मांग, मुख्यमंत्री सैनी से जवाब मांगा
फरीदाबाद, 16 अप्रैल 2026। एनआईटी-86 से पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने भाजपा सरकार की तथाकथित “जीरो टॉलरेंस” नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के मामलों में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार अब आरोप नहीं, बल्कि “प्रमाणित सच्चाई” बन चुका है, लेकिन सरकार अपने करीबियों को बचाने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।
मुख्यमंत्री पर सीधे सवाल
पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को घेरते हुए कई तीखे सवाल उठाए:
1. कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले में ढील क्यों?
नीरज शर्मा ने पूछा कि जब अन्य मामलों में सीबीआई जांच कराई जा रही है, तो पंचकूला नगर निगम से जुड़े कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले में सरकार पीछे क्यों हट रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले के तार भाजपा के पार्षदों, मेयर और बड़े नेताओं से जुड़े हो सकते हैं।
2. सन्नी गर्ग पर कार्रवाई क्यों नहीं?
उन्होंने सवाल उठाया कि “सन्नी गर्ग” पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्या वह किसी प्रभावशाली भाजपा नेता से जुड़ा हुआ है? उन्होंने मांग की कि निष्पक्षता साबित करने के लिए तुरंत सीबीआई जांच कराई जाए।
3. आउटसीज प्लॉट आवंटन घोटाला: अपने ही आदेशों से पीछे क्यों?
नीरज शर्मा ने कहा कि पंचकूला के आउटसीज प्लॉट आवंटन मामले में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सरकार के वकील ने भी उच्च न्यायालय में इसका समर्थन किया था, लेकिन बाद में जांच विजिलेंस को सौंप दी गई, जिससे मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
तीन बड़े घोटालों की सीबीआई जांच की मांग
पूर्व विधायक ने प्रदेश सरकार को चुनौती देते हुए तीन प्रमुख मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की:
- पंचकूला नगर निगम का कोटक महिंद्रा बैंक घोटाला
- नगर निगम फरीदाबाद का 200 करोड़ रुपये का कथित घोटाला
- पंचकूला का आउटसीज प्लॉट आवंटन घोटाला
सरकार पर तीखा हमला
नीरज शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एजेंसियों का इस्तेमाल केवल विपक्ष को दबाने के लिए करती है, जबकि अपने नेताओं के खिलाफ कार्रवाई से बचती है। उन्होंने कहा कि “यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ है, तो इन सभी मामलों को सीबीआई को सौंपे, न कि लीपापोती वाली विजिलेंस जांच कराए।”
आंदोलन और कानूनी लड़ाई की चेतावनी
पूर्व विधायक ने चेतावनी दी कि यदि इन मामलों में पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जनता के बीच जाकर भाजपा के “भ्रष्टाचार बचाओ अभियान” की पोल खोलेंगे और कानूनी लड़ाई को तेज करेंगे।








