– एमजी रोड पर सौंदर्यकरण के नाम पर गरीब वेंडर्स को हटाना अन्याय
– पंकज डावर ने भी किया समर्थन, दोहरी नीति पर उठाए सवाल
गुरुग्राम, 30 मार्च 2026। जनजागरण रेहड़ी पटरी समिति गुरुग्राम के महासचिव रोहतास ने नगर निगम द्वारा एमजी रोड पर रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को गैर-कानूनी और असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि जॉइंट कमिश्नर-3 कार्यालय से जारी आदेशों के बाद जिस तरह की बर्बर कार्रवाई की जा रही है, वह सीधे तौर पर पथ विक्रेताओं के अधिकारों का उल्लंघन है।
रोहतास ने स्पष्ट किया कि पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 की धारा 3(3) के अनुसार जब तक सर्वेक्षण पूरा नहीं हो जाता और वेंडिंग प्रमाणपत्र जारी नहीं होते, तब तक किसी भी वेंडर को उसके स्थान से हटाया नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 और 2018 में सर्वे हो चुका है, इसके बावजूद बिना नोटिस दिए कार्रवाई की जा रही है, जो कानून की अवहेलना है।
उन्होंने कहा कि धारा 18 के तहत किसी भी पथ विक्रेता को हटाने से पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है, लेकिन यहां इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। बिना नोटिस दुकानों को उजाड़ना और सामान जब्त करना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रहार है।
रोहतास ने यह भी कहा कि किसी क्षेत्र को नो-वेंडिंग जोन घोषित करने का अधिकार केवल टाउन वेंडिंग कमेटी को है, न कि प्रशासन को एकतरफा निर्णय लेने का। बिना पुनर्वास योजना के वेंडर्स को हटाना न्यायालय के निर्देशों की भी अवमानना है।
वहीं कांग्रेस के जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने भी इस मुद्दे पर जनजागरण रेहड़ी पटरी समिति के मांग पत्र का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नगर निगम बड़े कब्जाधारियों के प्रति नरम रवैया अपनाता है, जबकि गरीब रेहड़ी-पटरी वालों पर डंडा चलाया जा रहा है। यह दोहरी नीति कतई स्वीकार्य नहीं है।
डावर ने मांग की कि एमजी रोड पर चल रहे इस उजाड़ अभियान को तुरंत प्रभाव से रोका जाए और जब्त किया गया सामान बिना किसी जुर्माने के सम्मानपूर्वक वेंडर्स को वापस किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शहर के सौंदर्यकरण की योजना में रेहड़ी-पटरी वालों को शामिल किया जाना चाहिए, न कि उन्हें बाहर किया जाए।
मांग पत्र में यह भी आग्रह किया गया है कि स्ट्रीट वेंडिंग एक्ट के तहत सर्वेक्षण और पहचान पत्र वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए।
यह मांग पत्र मुख्यमंत्री, उपायुक्त, भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव, पुलिस आयुक्त गुरुग्राम, एनयूएलएम निदेशक और शहरी स्थानीय निकाय हरियाणा के निदेशक को भी भेजा गया है।







