— कमलेश भारतीय

क्रिकेट का नया आईपीएल सीजन शुरू हुए दो दिन हो चुके हैं, लेकिन असली रोमांच का श्रीगणेश अभी बाकी है। पहले मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने जिस सहजता से मात्र पंद्रह ओवर और एक गेंद में 201 रन का लक्ष्य हासिल किया, वह मुकाबला एकतरफा बन गया। ऐसा कहीं भी नहीं लगा कि टीम को 200 पार करने के लिए संघर्ष करना पड़ा हो।
सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान ईशान किशन की 80 रनों की पारी भी बेअसर रही। बाउंड्री पर फिल सॉल्ट द्वारा लिया गया उनका कैच मैच का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। यदि कुछ और रन जुड़ जाते तो मुकाबले में थोड़ी टक्कर देखने को मिल सकती थी। गेंदबाजों का उपयोग भी प्रभावी नहीं रहा और चौके-छक्के आसानी से लगते रहे।
उद्घाटन मैच में एक संवेदनशील पहल भी देखने को मिली, जहां पिछले वर्ष की घटना में मारे गए क्रिकेट प्रेमियों की स्मृति में बेंगलुरु टीम ने ग्यारह सीटें खाली रखकर श्रद्धांजलि दी—यह एक सराहनीय कदम रहा।
पहले दिन का मुकाबला पूरी तरह एकतरफा रहा, जबकि दूसरे दिन भी रोमांच का अभाव दिखा। विराट कोहली और रोहित शर्मा ने अपनी-अपनी टीमों के लिए शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन मुकाबलों में संघर्ष की कमी साफ नजर आई।
मुंबई इंडियंस ने इस बार एक अलग ही रिकॉर्ड बनाया—आईपीएल के इतिहास में पहली बार उन्होंने अपना पहला मैच जीता, जबकि आमतौर पर यह टीम सीजन की शुरुआत हार से करती रही है। हार्दिक पांड्या ने एक ओवर में 26 रन जरूर दिए, लेकिन जीत ने उस कमजोरी को ढक दिया। वहीं जसप्रीत बुमराह ने विकेट भले न लिया हो, लेकिन रन गति को नियंत्रित रखा।
कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से भी गेंदबाजी कमजोर दिखी। वरुण चक्रवर्ती की महंगी गेंदबाजी चिंता का विषय बनी रही, जबकि अजिंक्य रहाणे की कप्तानी पारी भी टीम को जीत नहीं दिला सकी।
इस बार चेन्नई सुपर किंग्स को शुरुआती मैचों में महेंद्र सिंह धोनी का साथ नहीं मिल पाएगा। घुटनों और पिंडलियों की समस्या से जूझ रहे धोनी के लिए यह संभवतः आखिरी आईपीएल सीजन हो सकता है।
साथ ही रविंद्र जडेजा, संजू सैमसन और अन्य खिलाड़ियों के टीम बदलाव ने इस सीजन को और दिलचस्प बना दिया है। राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई के बीच मुकाबला विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
युवा खिलाड़ियों में अर्जुन तेंदुलकर पर भी नजरें रहेंगी कि लखनऊ सुपर जायंट्स उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका देती है या नहीं।
फिलहाल शुरुआती मुकाबलों में गेंदबाजों का दबदबा कम और बल्लेबाजों का वर्चस्व ज्यादा देखने को मिला है। शार्दुल ठाकुर जैसे गेंदबाजों ने जरूर विकेट लेकर असर दिखाया, लेकिन कुल मिलाकर मुकाबले एकतरफा रहे।
खैर, आईपीएल का असली मजा अभी आना बाकी है। जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे संघर्ष, रोमांच और रिकॉर्ड्स का सिलसिला भी तेज होगा। आज के दौर में छक्के ऐसे लग रहे हैं जैसे कभी सलीम दुर्रानी मांग पर लगाया करते थे—बस फर्क इतना है कि अब मांग करने की जरूरत नहीं पड़ती!








