एमएसपी खत्म करने की साजिश का आरोप, खरीद प्रक्रिया में पेचीदगियाँ और अड़ंगे खड़े करने का दावा

चंडीगढ़/नई दिल्ली, 29 मार्च 2026। रणदीप सिंह सुरजेवाला, सांसद एवं महासचिव, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गेहूँ व सरसों की खरीद को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र व हरियाणा सरकार ‘चोर दरवाजे’ से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था को समाप्त करने की साजिश कर रही हैं, जिसके तहत खरीद प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बनाया जा रहा है।
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि रबी फसल खरीद के लिए जारी किए गए नए नियम किसान विरोधी हैं और इनके जरिए अनावश्यक बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, ताकि किसानों की फसल खरीदी ही न जा सके।
ट्रैक्टर-ट्रॉली नियम पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि सरकार ने यह शर्त लागू कर दी है कि किसान को अपनी फसल ट्रैक्टर-ट्रॉली में लानी होगी, जिस पर स्पष्ट नंबर लिखा हो और उसकी फोटो पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि जिन किसानों के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं है, वे क्या करेंगे? किराए की ट्रॉली के उपयोग पर भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे किसानों को परेशानी होगी।
समय सीमा से बढ़ेगी दिक्कत

सरकार द्वारा सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक ही मंडी में फसल लाने की अनुमति देने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इससे मंडियों के बाहर लंबी कतारें लगेंगी और किसानों की लागत व समय दोनों बढ़ेंगे।
बायोमेट्रिक और पोर्टल प्रक्रिया पर सवाल
‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के तहत हर बार किसान की बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करने को भी उन्होंने अव्यवहारिक बताया। उन्होंने कहा कि कटाई के दौरान किसान खेत में रहता है, ऐसे में हर बार मंडी आना संभव नहीं है। साथ ही इंटरनेट और बायोमेट्रिक तकनीकी समस्याएं भी बड़ी बाधा बन सकती हैं।
भूमिहीन किसानों की चिंता
सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा में बड़ी संख्या में किसान पट्टे पर जमीन लेकर खेती करते हैं। ऐसे में जमीन मालिक की अनुपस्थिति में फसल बिक्री की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे गरीब किसानों को नुकसान होगा।
उठान प्रक्रिया में ‘तीन हस्ताक्षर’ की बाध्यता
उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी से फसल उठान के लिए तीन अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य करना भी प्रक्रिया को धीमा करेगा और इससे खरीद प्रणाली ठप हो सकती है।
खरीद लक्ष्य और संसाधनों पर भी सवाल
सुरजेवाला ने दावा किया कि सरकार ने गेहूँ खरीद का लक्ष्य 80 लाख टन से घटाकर 72 लाख टन कर दिया है। इसके अलावा बारदाने की कमी और पोर्टल डेटा में गड़बड़ी को भी उन्होंने सुनियोजित लापरवाही बताया।
आंदोलन की चेतावनी
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने तुरंत इन “पेचीदगियों और अड़चनों” को दूर नहीं किया, तो हरियाणा के किसान और खेत मजदूर सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे।








