मानसून से पहले कार्य पूर्ण करने के निर्देश, 40 में से 12 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष फोकस

गुरुग्राम, 25 मार्च। नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) के आयुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में आयोजित सीवरेज मैनेजमेंट सेल (एसएमसी) और मॉनसून मैनेजमेंट सेल (एमएमसी) की समीक्षा बैठक में शहर की सीवर व्यवस्था और जलभराव की समस्याओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में 40 चिन्हित क्रिटिकल पॉइंट्स में से 12 अत्यंत महत्वपूर्ण स्थानों पर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।
12 प्राथमिक बिंदुओं पर विशेष निगरानी
समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई क्षेत्रों में सीवर लाइन बिछाने, ड्रेनेज सुधार और डीसिल्टिंग के कार्य निर्धारित समय सीमा के अनुरूप नहीं हो पाए हैं। सेक्टर-10, बसई, नाहरपुर रूपा, इंदिरा कॉलोनी और तिगरा जैसे क्षेत्रों में कार्य की प्रगति धीमी पाई गई।
निगमायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए। साथ ही, सभी संयुक्त आयुक्तों को निर्देशित किया गया कि वे 22 पूर्ण किए गए एसएमसी बिंदुओं का फील्ड निरीक्षण करें और फोटो सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
मानसून से पहले तैयारियों पर विशेष जोर
निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि मानसून से पहले सभी जरूरी कार्य पूरे किए जाएं ताकि जलभराव की समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने सभी अधिकारियों को फील्ड विजिट करने, सीवर लाइन की सीसीटीवी जांच और सुपर सकर मशीन से निरीक्षण तथा ड्रेनेज सिस्टम की समयबद्ध सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, 25 लाख रुपये तक के डीसिल्टिंग कार्यों की स्थिति की समीक्षा करने और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
समन्वय के साथ समाधान पर जोर
बैठक में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी बल दिया गया। एनएचएआई से जुड़े मुद्दों विशेषकर उमंग भारद्वाज चौक से हीरो होंडा चौक के बीच की समस्याओं के समाधान के लिए प्रोजेक्ट डायरेक्टर को बैठक में बुलाने के लिए कहा। वहीं, जीएमडीए अधिकारियों के लिए कहा गया कि वे गली ट्रैप, कल्वर्ट्स और चैनल्स की सफाई एवं डीसिल्टिंग सुनिश्चित करें, खासकर जहां एमसीजी के ड्रेन और सीवर से कनेक्शन हैं। इन सभी मुद्दों को आगामी समन्वय बैठक में प्राथमिकता से उठाया जाएगा।
सुरक्षा उपायों पर भी फोकस
निगमायुक्त ने जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली के खतरों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों से पूछा कि क्या इलेक्ट्रिक बॉक्स को खंभों पर 8-10 फीट ऊंचाई पर शिफ्ट किया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर जलभराव की संभावना अधिक रहती है, वहां प्राथमिकता के आधार पर बिजली सुरक्षा के उपाय किए जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
तेज गति से कार्य पूरा करना प्राथमिकता
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि शहर में जलभराव और सीवर से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्यों को तय समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि मानसून के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े









