रेवाड़ी, 25 मार्च 2026 – माजरा स्थित एम्स में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की 50 सीटों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा स्वीकृति दिए जाने पर स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे एक स्वाभाविक और रूटीन प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय को लेकर अनावश्यक श्रेय लेने की होड़ मचाई जा रही है, जबकि यह पहले से तय विकास क्रम का हिस्सा है।
2019 में मंजूरी, 2024 में स्थान तय—निर्माण कार्य जारी
विद्रोही ने बताया कि केंद्र सरकार ने 28 फरवरी 2019 को माजरा में एम्स स्थापना को मंजूरी दी थी और फरवरी 2024 में इसके स्थान को अंतिम रूप दिया गया। वर्तमान में एम्स भवन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि जब देश के 22वें एम्स का औपचारिक गठन हो चुका है, तो एमबीबीएस कक्षाओं का शुरू होना तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
2026-27 सत्र में कक्षाएं शुरू होंगी या नहीं—अभी संशय
हालांकि 50 सीटों को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन कक्षाएं वास्तव में 2026-27 सत्र से शुरू होंगी या नहीं, इस पर विद्रोही ने संशय जताया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि अकादमिक ब्लॉक समय पर तैयार होता है या नहीं और छात्रों के लिए छात्रावास की व्यवस्था कैसी रहती है।
शिक्षकों की भर्ती और वित्त मंत्रालय की मंजूरी बाकी
विद्रोही ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक एमबीबीएस कक्षाओं के लिए शिक्षकों और सपोर्टिंग स्टाफ की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इसके लिए वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिलना बाकी है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कक्षाएं शुरू होना मुश्किल प्रतीत होता है।
तकनीकी कारणों से देरी संभव, अगले साल तक पूरी होंगी औपचारिकताएं
उन्होंने कहा कि यदि तकनीकी कारणों से इस वर्ष कक्षाएं शुरू नहीं हो पाती हैं, तो अगले वर्ष तक सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी और एमबीबीएस कक्षाएं शुरू हो जाएंगी।
“श्रेय की राजनीति से हटकर देखें वास्तविकता”
विद्रोही ने कहा कि एम्स भवन निर्माण शुरू होते ही यह स्पष्ट हो गया था कि जैसे-जैसे बुनियादी ढांचा तैयार होगा, वैसे-वैसे एमबीबीएस कक्षाएं और ओपीडी सेवाएं स्वतः शुरू हो जाएंगी। इसलिए 50 सीटों की स्वीकृति को भी उसी क्रम की एक सामान्य प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी विशेष उपलब्धि के रूप में।









