0.34 वोट से मिली जीत पर जश्न नहीं, आत्ममंथन करे कांग्रेस: विद्रोही

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— ‘रणनीतिक विफलता और आंतरिक कमजोरी पर गंभीर सवाल’

रेवाडी, 18 मार्च 2026। स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा कांग्रेस को कड़ी और स्पष्ट सलाह देते हुए कहा है कि राज्यसभा चुनाव में मात्र 0.34 वोटों के बेहद मामूली अंतर से मिली “फेस सेविंग जीत” पर जश्न मनाने के बजाय पार्टी को गंभीर आत्मविश्लेषण करना चाहिए। उन्होंने इसे कांग्रेस की रणनीतिक कमजोरी और संगठनात्मक विफलता का स्पष्ट संकेत बताया।

विद्रोही ने कहा कि हरियाणा में कांग्रेस के पास 37 विधायक होने के बावजूद पार्टी उम्मीदवार को केवल 28 वोट मिलना अत्यंत चिंताजनक और शर्मनाक स्थिति है। ऐसे में जीत का जश्न मनाना वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा है। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा तीसरा उम्मीदवार उतारना कोई आकस्मिक कदम नहीं था, बल्कि यह उसकी मजबूत और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था।

उन्होंने कहा कि मीडिया में पहले से ही यह संकेत दिए जा रहे थे कि भाजपा राज्यसभा चुनाव में “खेला” करने की तैयारी कर चुकी है, जो अंततः सही साबित हुआ। विद्रोही के अनुसार, भाजपा चुनावों में सत्ता और धनबल सहित हर संभव हथकंडा अपनाने के लिए जानी जाती है, और जब तक कांग्रेस इन सभी तरीकों का प्रभावी मुकाबला करने की ठोस रणनीति नहीं बनाएगी, तब तक वह भाजपा के सामने कमजोर ही साबित होती रहेगी।

कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर प्रहार करते हुए विद्रोही ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वह प्रतिबद्ध और वैचारिक कार्यकर्ताओं की बजाय चाटुकार, अवसरवादी और धनबल वाले नेताओं पर अधिक भरोसा करती है। ऐसे लोगों को टिकट और संगठन में पद देने की प्रवृत्ति ने पार्टी की जड़ों को कमजोर किया है।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “कांग्रेस आज वही काट रही है, जो उसने वर्षों से बोया है।” जब तक पार्टी अपने चाल-चरित्र और कथनी-करनी में ठोस व गुणात्मक बदलाव नहीं लाएगी, तब तक उसे इसी तरह झटके सहते हुए जीतती हुई बाजी भी गंवानी पड़ेगी।

विद्रोही ने यह भी जोड़ा कि हर चुनाव के बाद कांग्रेस आत्ममंथन और सुधार की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। परिणामस्वरूप, स्थिति “पंचों की बात सिर माथे, पतनाला वहीं पड़ेगा” जैसी बनी रहती है।

निष्कर्ष:
यह परिणाम कांग्रेस के लिए चेतावनी है—यदि अब भी संगठन, रणनीति और नेतृत्व में सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य में ऐसे “कठिन जीत” भी हार में बदल सकती हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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