कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें सभी संस्थान : डीसी अजय कुमार

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पोश अधिनियम के प्रावधानों के पालन में लापरवाही पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना, आंतरिक समिति गठन अनिवार्य

गुरुग्राम, 21 फरवरी। डीसी अजय कुमार ने निर्देश दिए हैं कि महिलाओं का कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। अधिनियम के तहत प्रत्येक जिले में जिला स्तर स्थानीय समिति (लोकल कमेटी) का गठन अनिवार्य है।

डीसी अजय कुमार ने बताया कि गुरुग्राम जिले में अधिनियम के अनुरूप स्थानीय समिति का गठन किया जा चुका है, जो जिला स्तर पर यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों का विधिसम्मत निपटान करती है। यह समिति उन मामलों की सुनवाई करती है, जहाँ शिकायत नियोक्ता के विरुद्ध हो, संस्थान में 10 से कम कर्मचारी कार्यरत हों, आन्तरिक समिति का गठन न किया गया हो अथवा घरेलू कामकाज करने वाली महिलाएँ शिकायत दर्ज कराना चाहें। उन्होंने बताया कि अधिनियम के अनुसार प्रत्येक सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठन, जहाँ 10 या उससे अधिक अधिकारी/कर्मचारी कार्यरत हैं, वहाँ आन्तरिक समिति का गठन अनिवार्य है। आन्तरिक समिति का दायित्व है कि वह कार्यस्थल पर कार्यरत अथवा किसी कार्य हेतु आने वाली महिलाओं से संबंधित यौन उत्पीड़न की शिकायतों का निष्पक्ष एवं समयबद्ध निपटान सुनिश्चित करे।

डीसी ने बताया कि अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत ग्रामीण/जनजातीय क्षेत्रों में प्रत्येक ब्लॉक, तालुका एवं तहसील तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड/नगरपालिका स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। गुरुग्राम जिले में संबंधित क्षेत्र के एसडीएम तथा निकाय क्षेत्र में संयुक्त आयुक्त को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में बीडीपीओ तथा नगर परिषद/नगर पालिका समिति क्षेत्र में सचिव/कार्यकारी अधिकारी नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। नोडल अधिकारी का दायित्व है कि वे पोश अधिनियम से संबंधित प्राप्त शिकायत को सात दिवस के भीतर जिला स्तर पर गठित स्थानीय समिति को प्रेषित करें।

डीसी अजय कुमार ने सभी संगठनों को अपनी आन्तरिक समिति का गठन सुनिश्चित करने तथा वार्षिक प्रतिवेदन नियमानुसार जिला कार्यालय को प्रेषित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि यदि कोई नियोजक अधिनियम की धारा 13, 14 एवं 22 के तहत आवश्यक कार्रवाई करने में विफल रहता है अथवा अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित संगठन के विरुद्ध 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। पुनरावृत्ति की स्थिति में जुर्माना दोगुना किया जा सकता है तथा लाइसेंस निरस्त अथवा पंजीकरण समाप्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पीड़ित महिला अपनी शिकायत ई-मेल आईडी posh-grg.rev@hry.gov.in पर भी प्रेषित कर सकती है।

डीसी ने सभी विभागाध्यक्षों एवं संस्थान प्रमुखों से आह्वान किया कि वे अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें तथा कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा एवं सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

अब निजी क्षेत्र की महिलाएं भी SHe-Box पोर्टल पर दर्ज करा सकेंगी कार्यस्थल उत्पीड़न की शिकायत

डीसी अजय कुमार ने बताया अब निजी क्षेत्र में कार्यरत महिलाएं भी SHe-Box (सेक्सुअल हैरासमेंट इलेक्ट्रॉनिक्स बॉक्स) पोर्टल के माध्यम से कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकती हैं। यह सुविधा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित SHe-Box पोर्टल पर उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि यह पोर्टल महिलाओं को सुरक्षित, गोपनीय एवं पारदर्शी शिकायत प्रणाली उपलब्ध कराता है। जिला प्रशासन द्वारा निजी कंपनियों, औद्योगिक इकाइयों एवं विभिन्न कार्यालयों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि प्रत्येक कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा एवं सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

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Author: Bharat Sarathi

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