क्या आम जनता को सच में सामाजिक न्याय मिल रहा है? गुरिंदरजीत सिंह

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रसूखदारों पर मेहरबानी, गरीब पर सख्ती क्यों? प्रशासन दे जवाब। गुरिंदरजीत सिंह

गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल, अवैध कॉलोनियां काटने और अवैध मार्केट बनाने वालो पर कब होगी कार्रवाई?

संसाधनों पर पहला अधिकार देश की जनता का – घुसपैठ, बेरोजगारी और महंगाई पर बड़ा सवाल। गुरिंदरजीत सिंह

गुरुग्राम : विश्व समाजिक न्याय दिवस पर गुरुग्राम के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह अर्जुन नगर ने सामाजिक न्याय की वर्तमान स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आज आम जनता खुद को असुरक्षित और उपेक्षित महसूस कर रही है। एक ओर प्रभावशाली और रसूखदार लोग गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल चला रहे हैं, अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं, और अवैध मार्केट संचालित कर रहे हैं; वहीं दूसरी ओर प्रशासन की सख्ती केवल गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियों, रेहड़ियों और छोटे दुकानदारों तक सीमित दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि कार्रवाई “आदमी देखकर” हो रही है, न कि कानून के आधार पर। विपक्ष भी स्थानीय स्तर पर विधायक, पार्षद और प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ आवाज उठाने से बचता है। केवल केंद्र या राज्य सरकार पर बयानबाजी की जाती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर चुप्पी साध ली जाती है।

इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने यह भी प्रश्न उठाया कि जब सरकार यह कहती है कि उसने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, तो फिर 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? यदि 2014 से पहले 30 करोड़ लोग ही गरीबी रेखा के नीचे थे, तो यह आंकड़ों का अंतर कैसे समझाया जाएगा? क्या आंकड़े पारदर्शी हैं? क्या आम आदमी को वास्तविक सामाजिक न्याय मिल रहा है?

उन्होंने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ती अवैध गतिविधियों और संसाधनों के दबाव की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना है कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार देश की जनता का है। यदि व्यवस्थाएं चरमराती हैं, तो उसका सीधा प्रभाव आम नागरिक पर पड़ता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों की स्थिति दयनीय है। वर्षों से अधूरे या जर्जर अस्पतालों का निर्माण नहीं हुआ, जबकि निजी अस्पताल आम नागरिक की पहुंच से बाहर हैं। बढ़ते प्रदूषण और बीमारियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की कमी सामाजिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है।

शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में हजारों सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। मजबूरी में अभिभावक निजी स्कूलों की ओर रुख करते हैं, जहां अत्यधिक शुल्क लिया जाता है। कई मामलों में यह सामने आया है कि कुछ स्कूलों ने मान्यता का झूठा दावा कर बच्चों का भविष्य दांव पर लगा दिया। मीडिया में मामला उजागर होने के बाद भी प्रशासन की कार्रवाई धीमी रही। एफआईआर दर्ज होने के बावजूद ऐसे संस्थानों पर कठोर कार्रवाई कब होगी, यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

अंत में गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि यदि कानून सबके लिए समान नहीं है, यदि कार्रवाई केवल कमजोर पर होती है, यदि शिक्षा और स्वास्थ्य आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं, तो फिर सामाजिक न्याय का दावा खोखला प्रतीत होता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए और रसूखदारों के खिलाफ भी निष्पक्ष व सख्त कार्रवाई हो।

“राष्ट्र प्रथम, समाज सर्वोपरि – न्याय सबके लिए समान हो।”
इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह, अर्जुन नगर, गुरुग्राम

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Author: Bharat Sarathi

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