– कहा , हरियाणा ने आर्थिक मजबूती के नए मानदंड स्थापित किए
चंडीगढ़ , 20 फरवरी – हरियाणा के राज्यपाल प्रोफ़ेसर असीम कुमार घोष ने कहा कि हरियाणा सरकार राजकोषीय स्थिरता और दक्ष कर प्रबंधन को प्राथमिकता दे रही है। इसके परिणामस्वरूप, हरियाणा ने आर्थिक मजबूती के नए मानदंड स्थापित किए हैं। इस वित्तीय वर्ष में जनवरी माह तक, कुल राज्य जी.एस.टी. वृद्धि में हरियाणा देश में सभी राज्यों में प्रथम स्थान पर रहा है।
प्रोफ़ेसर असीम कुमार घोष शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के शुभारंभ अवसर पर अपना अभिभाषण दे रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि राज्य में GST संग्रहण में यह ज़बरदस्त बढ़ोतरी न सिर्फ हरियाणा के नागरिकों की उद्यमिता की भावना को दर्शाती है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था के लगातार विस्तार और बढ़ती मजबूती की ओर भी इंगित करती है। आबकारी, VAT और CST से राजस्व भी बजट लक्ष्य के हिसाब से लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि कर-प्रणाली को और अधिक मानवीय और सरल बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम-2025 को नागरिकों का बहुत समर्थन मिला है। इससे 1.15 लाख से अधिक छोटे दुकानदारों को लाभ हुआ है।करदाता-अनुकूल मोबाइल एप्लिकेशन और अलग-अलग ई-गवर्नेंस पहलों के ज़रिए पारदर्शिता को मज़बूत किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में, GST 2.0 सुधारों से कर प्रणाली में एक बड़ा बदलाव आया है। इसमें सरलीकृत दो-स्लैब संरचना, तार्किक दरों और तेज़ी से रिफंड शामिल हैं, जिससे GST और अधिक नागरिक केंद्रित और बिज़नेस-फ्रेंडली बन गया है।
आर्थिक विकास को समावेशी, संतुलित और दीर्घकालिक बनाया
प्रोफ़ेसर असीम कुमार घोष यह भी कहा कि मज़बूती से बढ़ती अर्थव्यवस्था ही सुशासन, सामाजिक न्याय और भविष्योन्मुखी सतत् विकास को सुनिश्चित करती है। राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और परिणामोन्मुखी योजनाओं को केंद्र में रखकर आर्थिक विकास को समावेशी, संतुलित और दीर्घकालिक बनाने का निरंतर प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि देश के भौगोलिक क्षेत्र का केवल 1.34 प्रतिशत और जनसंख्या का 2.09 प्रतिशत होने के बावजूद, हरियाणा राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 3.8 प्रतिशत का प्रभावी योगदान दे रहा है। हरियाणा का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2025-26 में स्थिर मूल्यों पर 9.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जो वास्तविक आर्थिक विकास को दर्शाती है। वर्तमान मूल्यों पर, प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 3.95 लाख रुपये हो गई है, जो बेहतर जीवन यापन स्तर को दर्शाती है।
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय GST संग्रहण में 7.34 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ, हरियाणा देश में पांचवें स्थान पर है, जो प्रदेश की सुदृढ़ कर प्रणाली को दर्शाता है।शासन को और अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए 160 योजनाओं के लाभ सीधे हस्तांतरण के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचाए जा रहे हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में, इन योजनाओं के लाभार्थियों को 11,403 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। विकेंद्रित नियोजन को मज़बूत करने के लिए जिला योजनाओं के लिए आवंटन भी बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर जीडीपी और जीएसटी संग्रह में राज्य के महत्वपूर्ण योगदान, इसके सीमित भौगोलिक क्षेत्र व जनसंख्या आकार तथा सुदृढ़ वित्तीय मानकों को ध्यान में रखते हुए 16वें केंद्रीय वित्त आयोग के समक्ष केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा बढ़ाने के लिए मज़बूती से अपना पक्ष रखा। यह हर्ष की बात है कि आयोग ने इन तथ्यों को माना और कर में हिस्सा देने के फ़ॉर्मूले में पहली बार 10 पॉइंट्स के वेटेज के साथ “जीडीपी में योगदान” का एक नया मानदंड पेश किया। परिणामस्वरूप, करों में हरियाणा का हिस्सा 15वें वित्त आयोग के 1.093% से बढ़कर 1.361% हो गया है, अर्थात् इसमें 24.52% की बढ़ोतरी हुई। कुल मिलाकर, हरियाणा को 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा में कुल 61,736 करोड़ रुपये प्राप्त हुए और 16वें वित्त आयोग के अनुमान के अनुसार राज्य को लगभग 1,42,156 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो पहले के हिस्से से 2.3 गुना ज़्यादा है।
प्रोफ़ेसर असीम कुमार घोष ने सरकार की बेहतर आर्थिक एवं वित्तीय नीति पर बधाई देते हुए कहा कि हरियाणा ने सभी राज्यों में सबसे ज़्यादा प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ाने वाला टॉप राज्य होने का गौरव प्राप्त किया है।

