युवा शक्ति नवाचार के माध्यम से ‘विकसित भारत- विकसित हरियाणा’ के विज़न को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है : राज्यपाल प्रोफ़ेसर असीम कुमार घोष

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 कहा , हरियाणा सरकार ने युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता दी

चंडीगढ़ , 20 फरवरी – हरियाणा के राज्यपाल प्रोफ़ेसर असीम कुमार घोष ने कहा कि युवा शक्ति नवाचार के माध्यम से ‘विकसित भारत- विकसित हरियाणा’ के विज़न को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। हरियाणा सरकार ने भी युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता दी है।

प्रोफ़ेसर असीम कुमार घोष शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के शुभारंभ अवसर पर अपना अभिभाषण दे रहे थे।

प्रोफ़ेसर असीम कुमार घोष ने युवा शक्ति को हरियाणा का भविष्य बताते हुए कहा कि हरियाणा की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा वर्ग है। यह वही युवा शक्ति है, जो खेतों में परिश्रम करती है, खेल के मैदानों में देश का नाम रोशन करती है और नवाचार के माध्यम से ‘विकसित भारत- विकसित हरियाणा’ के विज़न को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। राज्य सरकार ने युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता दी है। इससे रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं और युवाओं में आत्मविश्वास जगा है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा कौशल रोज़गार निगम ने राज्य की भर्ती प्रक्रिया में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। इसके द्वारा अब तक लगभग 1 लाख 18 हजार संविदा कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। इन युवाओं को न सिर्फ़ रोज़गार मिला है, बल्कि उन्हें सेवा अवधि की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा लाभ, चिकित्सा और जीवन बीमा सुरक्षा देकर उनका भविष्य सुरक्षित किया गया है।

राज्यपाल ने कहा कि हरियाणा कौशल रोज़गार निगम ने खुद को एक अधिकृत भर्ती एजेंसी के रूप में भी पंजीकृत किया है और विदेशी नियोक्ताओं के साथ तालमेल भी बनाया है। इससे राज्य के युवाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानजनक रोज़गार के अवसरों के द्वार खुले हैं। राज्य के 200 युवाओं को इज़राइल में कंस्ट्रक्शन वर्कर और 210 अन्य युवाओं को यूनाइटेड अरब अमीरात में बाइक राइडर और वेयरहाउस असिस्टेंट के तौर पर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से नियुक्त किया गया है।

प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण को उच्च प्राथमिकता दे रही है। ‘दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना’ के तहत 4,826 ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है। ग्रामीण स्व-रोज़गार प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से इस साल 14 हजार 198 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही, इनमें से 70 प्रतिशत युवाओं को स्व-रोज़गार से जोड़ा गया है।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि हर हरियाणवी युवा अपने क्षेत्र में हुनरमंद बने। श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी के ज़रिए अत्याधुनिक प्रशिक्षण की शुरुआत इसका जीवंत उदाहरण है। वैश्विक और स्थानीय चुनौतियों से निपटने के लिए, हमने देश में अपनी तरह का पहला ‘डिपार्टमेंट ऑफ़ फ्यूचर’ बनाया है। यह पहल वर्ष 2047 तक ‘विकसित हरियाणा’ के विज़न को पूरा करने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है। यह डेटा विश्लेषण और भविष्योन्मुखी नीतियों से प्रशासन को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा।

राज्यपाल ने कहा कि देश की सेवा और सुरक्षा प्रदेश के युवाओं के संस्कारों में रची-बसी है। हरियाणा सरकार देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहीद होने वाले वीर जवानों और उनके परिवारों की आभारी है। उनके बलिदान को सर्वोपरि रखते हुए, अक्तूबर, 2014 से अब तक सशस्त्र बलों एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के शहीदों के 418 आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। राज्य सरकार प्रदेश के अग्निवीरों के त्याग और समर्पण को भी पूरा समर्थन दे रही है। हरियाणा के अग्निवीरों को सुरक्षा बलों के नियमित कर्मचारियों की तरह ही एक्स-ग्रेसिया ग्रांट और अवॉर्ड दिए जा रहे हैं।

शिक्षा : ज्ञान से सशक्त समाज

राज्यपाल प्रोफ़ेसर असीम कुमार घोष ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की दीर्घकालिक पूंजी होती है। प्रदेश सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और समान अवसर पर विशेष ध्यान दिया है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थी केवल डिग्री नहीं, वरन जीवन कौशल भी प्राप्त कर सकें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हरियाणा को ज्ञान आधारित समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘गुरु-शिष्य योजना’ के तहत गुरु-शिष्य परंपरा को फिर से जीवंत करने के उद्देश्य से अब तक 219 गुरुओं और 270 शिष्यों को नामांकित किया गया है। इनमें से 126 गुरुओं को सफलतापूर्वक मान्यता दी जा चुकी है। पलवल, फरीदाबाद, सिरसा, ऐलनाबाद, होडल और पंचकूला में चल रहा यह कार्यक्रम कौशल विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित कर रहा है। वर्ष 2022-23 के लिए, हरियाणा ने 34.8 प्रतिशत का सकल नामांकन अनुपात (GER) हासिल किया है। लड़कियों का 39.1 प्रतिशत नामांकन महिला सशक्तिकरण की सकारात्मक छवि पेश कर रहा है। यह राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है और हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप इसे 50 प्रतिशत करने के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। विद्यार्थियों, खासकर लड़कियों को उनके घर के नजदीक ही उच्च शिक्षा की सुविधा देने के लिए मेरी सरकार ने 20 किलोमीटर के दायरे में कम से कम एक कॉलेज स्थापित किया है।

राज्यपाल ने आगे बताया कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना है। चालू वित्त वर्ष में 20 करोड़ रुपये के शुरुआती आवंटन के साथ ‘हरियाणा राज्य अनुसंधान कोष’ बनाया गया है। यह विद्यार्थियों और शिक्षकों में वैज्ञानिक सोच को एक नई दिशा देगा। इसके अलावा, 22 जिला स्तर के महाविद्यालयों में आम नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए 24×7 लाइब्रेरी और वाचनालय की सुविधा शुरू की गई है।

उन्होंने बताया कि ‘सुपर 100’ कार्यक्रम मेधावी विद्यार्थियों के सपनों को उड़ान देने में एक वरदान सिद्ध हुआ है। शैक्षणिक सत्र 2023-24 से, सरकारी स्कूलों के बच्चे इस कोचिंग प्रोग्राम के ज़रिए IIT-JEE और NEET में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। वर्ष 2018 से अब तक 198 विद्यार्थियों का IITs व NIT में और 252 विद्यार्थियों का जाने-माने मेडिकल कॉलेजों में चयन इस प्रोग्राम की सफलता का प्रमाण है। इसी तरह, ‘मिशन बुनियाद’ के तहत, 9वीं और 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों की शैक्षणिक नींव मज़बूत करने के लिए 103 केंद्रों पर 5,000 मेधावी विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें नि:शुल्क वर्दी और लेखन सामग्री भी दी जा रही है। यह सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हमारे विद्यार्थी पीछे न रहें, इसके लिए सरकारी स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से फ्रेंच भाषा सिखाना शुरू किया गया है।

प्रोफेसर घोष ने बताया कि राज्य सरकार हरियाणा को विज्ञान और नवाचार का वैश्विक हब बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। अटल टिंकरिंग लैब्स और डिजिटल लैब्स के ज़रिए, हम स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बना रहे हैं। अंबाला में 85 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे ‘आर्यभट्ट साइंस सेंटर’ और कुरुक्षेत्र में ‘कल्पना चावला स्मृति तारामंडल’ के आधुनिकीकरण से राज्य में वैज्ञानिक चेतना को और बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि लड़कियों को इंजीनियरिंग विषयों की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ‘कल्पना चावला स्कॉलरशिप स्कीम’ शुरू की गई है। इस योजना के तहत, हर साल एक-एक लाख रुपये तक की 250 छात्रवृत्तियां दी जाएंगी। इनके अलावा, ‘विज्ञान रत्न अवॉर्ड’ योजना के तहत 5 लाख रुपये तक के पुरस्कार दिए जाते हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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