हरियाणा में प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता 3.67 लाख करोड़ रुपये, नाबार्ड स्टेट फोकस पेपर किया जारी

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कृषि को लाभकारी बनाए बिना ग्रामीण समृद्धि संभव नहीं— मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

नवाचार, तकनीक और वित्तीय सहयोग से बदलेगी हरियाणा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था

सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने की दिशा में हरियाणा अग्रसर

चंडीगढ़, 5 फरवरी— हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने नाबार्ड द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय ऋण संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि हरियाणा ने देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बदलते समय के साथ कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने कई नई चुनौतियां भी आई है, जिनमें गिरता भूजल स्तर, मिट्टी की सेहत में गिरावट, छोटी जोत आकार, जलवायु परिवर्तन और उत्पादन लागत में वृद्धि प्रमुख हैं। इन चुनौतियों का समाधान परंपरागत तरीकों से नहीं, बल्कि नवाचार, तकनीक और संस्थागत वित्तीय सहयोग से ही संभव है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नाबार्ड द्वारा तैयार किया गया वर्ष 2026-27 का स्टेट फोकस पेपर भी रिलीज किया, जिसमें हरियाणा की प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता 3 लाख 67 हजार करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है, जोकि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अनेक समितियां को बेहतर कार्यों के लिए सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाए बिना ग्रामीण समृद्धि संभव नहीं है। इसलिए हमें ‘कम भूमि में अधिक उत्पादन’ और ‘Per Drop-More Crop’ के मंत्र को व्यवहार में उतारना होगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए बुनियादी ढांचा भी उतना ही आवश्यक है, जितना की ऋण की सुविधा। इसके साथ—साथ सिंचाई, भंडारण, वेयरहाउसिंग, ग्रामीण सड़कें, बिजली, डिजिटल कनेक्टिविटी, ये सभी विकास की नींव हैं। उन्होंने कहा कि आगामी बजट में स्मार्ट एग्रीकल्चर जोन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए अलग से क्लस्टर बनाए जा रहे हैं।

किन्नू , अमरूद, स्ट्रॉबेरी, लीची आदि के क्लस्टर बनाए जा रहे हैं ताकि किसान परंपरागत खेती को छोड़कर नई आधुनिक खेती को अपनाए। किसान गन्ना की खेती अपनाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि मिटटी से मशीन और खेत से बाजार को पुख्ता बनाया जाये ताकि किसान द्वारा उगाई गई फसल को बेहतर बाजार मिल सके और साथ ही बेहतर भाव भी मिल सके।  

मुख्यमंत्री ने बैंकों से आग्रह किया कि वे प्रत्येक पात्र किसान तक समयबद्ध, सरल और पारदर्शी तरीके से ऋण सुविधाएं पहुंचाएं ताकि, हमारे अन्नदाता बिचौलियों के चंगुल से मुक्त होकर आत्मनिर्भर बन सकें। इस कार्य में नाबार्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नाबार्ड द्वारा कृषि एवं ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में लगातार सहयोग किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एम.एस.एम.ई., स्वयं सहायता समूह, महिला उद्यमिता और सहकारी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। हरियाणा में 710 पैक्स कार्यरत हैं। इसके अलावा, सहकारी बैंकों को कम्प्यूटरीकृत किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पैक्स पर किसान को पूरा विश्वास है लेकिन पिछले कुछ समय में पैक्स की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों में चिंता है।  हमें किसानों के इस विश्वास को पुनः बहाल करना है क्यूंकि ग्रामीण विकास में पैक्स का महत्वपूर्ण रोल है।  

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने के लिए हरियाणा सरकार लगातार अनेक कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के माध्यम से किसानों द्वारा की जा रही खेती की जानकारी अपलोड करवाई गई। किसानों को मांग के अनुरूप खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। खाद की कालीबाज़ारी रुकी और लगभग 700 करोड़ रुपये की सब्सिडी की भी बचत हुई।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी ने मिलकर विकसित भारत— 2047 के संकल्प को साकार करना है। इस कार्य में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी बैंक सुगम ऋण सुविधा उपलब्ध करवाएं, ताकि हमारा किसान आत्मनिर्भर बने। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ का मार्ग ‘विकसित हरियाणा’ से होकर गुजरेगा। इसमें नाबार्ड, बैंक, राज्य सरकार और सभी हितधारकों के साझे प्रयासों से हम एक ऐसे हरियाणा का निर्माण करेंगे, जहां समृद्धि अंतिम पंक्ति तक पहुंच पाए।

इस अवसर पर नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक निवेदिता तिवारी ने मुख्यमंत्री व अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए विस्तार से नाबार्ड की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि नाबार्ड द्वारा हरियाणा में वर्ष 2026-27 के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) के अंतर्गत 3.67 लाख करोड़ रुपये की ऋण क्षमता का आकलन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक है। इसमें कृषि क्षेत्र के लिए 1.32 लाख करोड़ रुपये तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपये की ऋण संभावनाएं निर्धारित की गई हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों, उद्यमियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वित प्रयास कर रही है, ताकि ‘विकसित हरियाणा – विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि नाबार्ड द्वारा महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण आधारभूत ढांचे के विकास के लिए ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (RIDF) के अंतर्गत अब तक 18,393 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिसमें से 14,066 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इन निधियों का उपयोग सड़कों, सिंचाई, नवीकरणीय ऊर्जा, अनाज भंडारण, पेयजल, स्वच्छता एवं विद्युत जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि स्टेट फोकस पेपर 2026-27 में फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, माइक्रो इरिगेशन, बागवानी, वैल्यू एडिशन,  जलवायु अनुकूल कृषि, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सुदृढ़ करना, ग्रामीण एमएसएमई को बढ़ावा देना, नवीकरणीय ऊर्जा और सामाजिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है ताकि सहकार से समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सके।

इस अवसर पर एसीएस अनुराग अग्रवाल, आयुक्त एवं सचिव सी जी रजनीकांथन, कृष्ण शर्मा सहित बैंक प्रतिनिधि, अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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