रेवाडी, 5 फरवरी 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने पंजाब और हरियाणा की जागरूक जनता से सवाल किया कि यदि कोई नेता अपनी मूल पार्टी को छोड़कर निजी स्वार्थों के लिए दूसरे दल में शामिल होता है, तो क्या उसे गद्दार न कहकर महात्मा बताकर सार्वजनिक अभिनंदन किया जाना चाहिए?
विद्रोही ने कहा कि रवनीत बिट्टू को राहुल गांधी द्वारा “गद्दार दोस्त” कहे जाने को भाजपा जिस तरह सिख समुदाय के अपमान से जोड़कर पेश कर रही है, वह देश और समाज को गुमराह करने का प्रयास है। उन्होंने इसे गंभीर सामाजिक अपराध बताते हुए आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति से जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि कोई भ्रष्टाचारी, हत्यारा या दुष्कर्मी भाजपा की शरण में चला जाए, तो क्या आमजन उसे अपराधी मानना छोड़कर महात्मा मान लें? विद्रोही के अनुसार, दलबदलुओं और आरोपित व्यक्तियों के विरोध को जाति या धर्म से जोड़कर उन्हें महान बताने की कोशिश समाज के लिए खतरनाक संकेत है।
विद्रोही ने यह भी कहा कि सिख समुदाय का वास्तविक अपमान तब हुआ था, जब तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे पंजाब और हरियाणा के किसानों को कुछ भाजपा नेताओं द्वारा कभी “खालिस्तानी” तो कभी “आतंकवादी” कहा गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि रवनीत बिट्टू के मुद्दे को सिख धर्म से जोड़कर भाजपा नैतिक और सामाजिक मूल्यों को गिरावट की ओर धकेल रही है। विद्रोही ने चेतावनी दी कि यदि इसी तरह दलबदलुओं और अपराध के आरोपित लोगों को महिमामंडित किया गया, तो इससे समाज और देश में अराजकता फैलने का खतरा बढ़ सकता है।






