— विकास, निवेश और प्राथमिकताओं पर मंथन“बजट केवल आंकड़े नहीं, भविष्य की दिशा है” — धर्मपाल ढुल

हिसार। देश की आर्थिक दिशा, विकास की प्राथमिकताओं और सामाजिक दायित्वों को निर्धारित करने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 पर वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब, हिसार में एक विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का उद्देश्य बजट की प्रमुख घोषणाओं, उनके व्यापक प्रभाव तथा आम नागरिकों—विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों—से जुड़े पहलुओं पर गंभीर विमर्श करना रहा।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं मुख्य संचार अधिकारी (सेवानिवृत्त) श्री धर्मपाल ढुल ने कहा कि बजट केवल आंकड़ों और घोषणाओं का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि इसके माध्यम से सरकार यह स्पष्ट करती है कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास-दिशा क्या होगी। उन्होंने कहा कि इस बार का बजट कई अहम सवालों के जवाब देता है—कहां खर्च बढ़ेगा, निवेश को कितनी गति मिलेगी और इंफ्रास्ट्रक्चर को किस स्तर की प्राथमिकता मिलेगी। बजट में वर्तमान राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के साथ सत्तारूढ़ राजनीतिक दल की नीति और सोच की झलक भी दिखाई देती है।
श्री ढुल ने कहा कि व्यापार और उद्योग के माध्यम से अर्थव्यवस्था को गति देने का प्रयास बजट में साफ नजर आता है और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया गया है। टियर-2 और टियर-3 शहरों को विकास के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल से शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, जिससे छोटे शहरों में निवेश और रोजगार बढ़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ा फोकस एरिया बनकर उभरा है और पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है। सड़क, रेलवे, फ्रेट कॉरिडोर, जलमार्ग और कोस्टल कार्गो से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना भी बनाई गई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव वाले क्षेत्रों को दिए गए महत्व की झलक बुनियादी ढांचा विकास में दिखाई देती है।
आईटी और आईटीईएस सेक्टर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सेफ हार्बर लिमिट बढ़ाने से टैक्स विवाद कम होंगे, जबकि सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा भारत में चिप निर्माण और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूती देगी। डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं को दी गई टैक्स राहतें भी सकारात्मक प्रभाव डालेंगी। इनकम टैक्स में बड़ी राहत न होने के बावजूद नया इनकम टैक्स एक्ट लाने का फैसला टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। टीडीएस-टीसीएस नियमों में ढील से करदाताओं और कारोबारियों की परेशानियां कम होने की उम्मीद है।
वरिष्ठ नागरिकों और सामाजिक सुरक्षा के संदर्भ में श्री ढुल ने कहा कि बजट में स्वास्थ्य सेवाओं, हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है, जिससे बुजुर्गों को उपचार में राहत मिल सकती है। वरिष्ठ नागरिक बचत योजनाओं और सुरक्षित निवेश विकल्पों में निरंतरता से आर्थिक सुरक्षा को बल मिलेगा। उन्होंने बताया कि खाद्य, उर्वरक और एलपीजी जैसी आवश्यक सब्सिडी को अधिक लक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) पर जोर दिया गया है, ताकि जरूरतमंद वर्गों तक लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचे। पेंशनधारकों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक कल्याण योजनाओं की निरंतरता से आम नागरिकों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
इस अवसर पर चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. आर. के. खटकड़ ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि योजना-निर्माण और प्राथमिकताओं की कमी स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में विकास के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन आवश्यक है, लेकिन शिक्षा को अत्यधिक निजी क्षेत्र की ओर धकेलने से गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिसका नकारात्मक असर समग्र विकास पर पड़ेगा। उन्होंने कृषि, शिक्षा और मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों के लिए बजटीय प्रावधानों को अपर्याप्त बताया, क्योंकि देश की बड़ी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है।
गोष्ठी में डॉ. राजपाल सिंह खरब, डॉ. ए. एल. खुराना, श्री करतार सिंह, श्री सुबे सिंह लाठर, श्री योगेश सुनेजा सहित अन्य सदस्यों ने भी बजट के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए।







